बोले तारक मेहता फेम शैलेश-बच्चों के हाथ में हो किताब, मोबाइल हमारी कल्चर के लिए खतरा

बोले तारक मेहता फेम शैलेश-बच्चों के हाथ में हो किताब, मोबाइल हमारी कल्चर के लिए खतरा

Prakash Chand Joshi | Publish: Jan, 07 2018 03:23:43 PM (IST) Ajmer, Rajasthan, India

संस्कृति के साथ बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा मोबाइल है। बच्चों से दूर रखें, वरना संस्कृति बचाना मुश्किल हो जाएगा।

चंद्रप्रकाश जोशी/अजमेर।

टीवी सीरियल तारक मेहता का उल्टा चश्मा फेम एवं कवि शैलेश लोढ़ा ने कहा कि अगर संस्कृति को बचाना है तो बच्चों के हाथ में मोबाइल नहीं किताब दीजिए। वाट्सएप, फेसबुक के चलते सहजता, सादगी एवं बंदगी सब कुछ भूल गए हैं। संस्कृति के साथ बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा मोबाइल है। अभिभावक मोबाइल को बच्चों से दूर रखें, वरना संस्कृति बचाना मुश्किल हो जाएगा।

लोढ़ा रविवार को अजमेर में जैन इन्टरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन जीतो अजमेर चेप्टर के लॉन्च कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि आज हम भाषा भूल रहे हैं, बच्चे हिन्दी के बजाय अंग्रेजी पर ज्यादा ध्यान दे रहे है।
अभिभावक बच्चों को भले ही अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाएं मगर मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूंढ़ाड़ी व राजस्थानी भूल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आनंद एवं मनोरंजन मोबाइल में नहीं हर क्षण में आनंद है। उन्होंने आडम्बर पर भी तंज कसा।

मारवाड़ी भूल गए तो कैसे बचेगी संस्कृति

लेखक और कवि लोढ़ा ने कहा कि अगर मारवाड़ी भूल गए तो संस्कृति कैसे बचा पाएंगे। अंग्रेजी के चक्कर में प्रेम प्रदर्शन भूल गए, पति को 'बेबी नाम से पुकार रहे हैं। हमारे संस्कार, भाषा को अपनाएं। किसी डिप्लोमा या डिग्री से ज्ञान नहीं मिलता है। ज्ञान हमारी संस्कृति में बसा है। इसको बचाए रखने की जिम्मेदारी हमारी है। हम अपनी पुरानी जड़ों, भाषा, पहनावे से धीरे-धीरे दूर हो रहे हैं। इसको हमें हर हाल में जिंदा रखना है। राजस्थान की वैसे भी पूरे देश और विदेश में अलग पहचान है। यहां का खान-पान, किले, महल, बोलियां सबसे विशिष्ट है।

जोधपुर से है नाता
तारक मेहता फेम शैलेश का नाता जोधपुर से है। वे जोधपुर के मूल निवासी हैं। काव्य और लेखन क्षेत्र में बरसों से सक्रिय है। उन्हें टीवी धारावाहिक तारक मेहता का उल्टा चश्मा से ज्यादा लोकप्रिया मिली। घर-घर में यह सीरियल बड़े उत्साह से देखा जाता है। इसके अलावा वाह-वाह क्या बात है...सीरियल में भी काम कर चुके हैं। शैलेश अजमेर कई बार आ चुके हैं। साल 2015 में वे अजमेर लिटरेचर फेस्टिवल में आए थे। उन्होंने अपनी निजी जिंदगी के कई पन्नों से लोगों को रूबरू कराया था।

 

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