कोरोना का ऐसा भय : ठेकेदार बोला - अस्पताल की संक्रमित चादरें मैं नहीं धो सकता...

धौलपुर के जिला अस्पताल की चादरें,कंबल व अन्य की धुलाई के लिए ठेका है, क्वॉरंटीन सेंटर तथा कोरोना पॉजिटिव वार्ड के पलंगों पर बिछाई चादरें धुलाने की समस्या,अस्पताल प्रबंधन ने डिस्पोजल चादरें मंगवाई

By: suresh bharti

Published: 05 May 2020, 01:23 AM IST

अजमेर/धौलपुर. कोरोना का कितना भय है। हर कोई इसके नाम से ही डरने लगा है। इंसान-इंसान को आशंका से देख रहा है। रिश्तेदार, मित्र और परिजन भी पराए से हो गए। खाने-पीने की वस्तुओं में भी कोरोना के छिपे होने का डर सता रहा।

घर के भीतर और बाहर कोरोना का आतंक सा है। कोरोना ने लोगों की दिनचर्या ही बदल दी है। धौलपुर के जिला अस्पताल में तो ठेकेदार ने चादरें धोने से ही यह कहकर मना कर दिया कि इन पर कोरोना संदिग्ध व पॉजिटिव मरीज सोए हैं। ऐसे में चादरें संक्रमित हो सकती है।

चिकित्सा विभाग ने जिले के क्वॉरंटीन व आइसोलेशन सेंटरों पर पॉजिटिव व संदिग्ध मरीजों के गद्दों पर बिछाने के लिए चादरें उपलब्ध कराई थी। जो बड़ी संख्या में हैं। नियमानुसार इनकी समय-समय धुलाई होना जरूरी है,लेकिन ठेकेदार के मना करने पर समस्या पैदा हो गई। चिकित्सा विभाग अब डिस्पोजल चादरें उपयोग में लेगा। अस्पतालों में रोगियों के पलंगों पर कपड़े की चादरें ही काम में ली जाती हैं, जिनकी नियमित धुलाई कराने की व्यवस्था है।

प्रशासन द्वारा धौलपुर शहर में पॉलिटेक्निक कॉलेज में क्वॉरंटीन व आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। इसमें भर्ती कोरोना पॉजिटिव व संदिग्ध रोगियों के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने शुरू से ही कपड़े की ही चादरें उपलब्ध कराई है।

चादरें होने लगी थी बदरंग

कोरोना पॉजिटिव व संदिग्ध रोगियों की चादरों को धोने में धौलपुर अस्पताल के कपड़े धोने के ठेकदार द्वारा डर के चलते टालम-टोल की जा रही है। इसके अलावा सोडियम हाईपोक्लोराइड व ब्लीचिंग पावडर से सेनिटाइज किए जाने से यह चादरें जहां बदरंग हो रही थी। वहीं इनका कपड़ा भी खराब हो रहा था। इससे यह चादरें भी एक-दो बार से अधिक उपयोग योग्य नहीं रही थी। इससे विभाग को अधिक आर्थिक नुकसान हो रहा था।

धुलाई कीमत में मिली डिस्पोजल चादरें

चिकित्सा विभाग प्रशासन को चादरों की धुलाई व सेनेटाइजिंग पर करीब 15 से 20 रुपए तक का खर्चा आ रहा था। चादर की कीमत अलग से चुकानी पड़ रही थी। इन चादरों की धुलाई कराने में ठेकेदार डर के चलते आनाकानी कर रहा था। कई सेंटरों से तो सोमवार तक काम में ली जा चुकी चादरें धुलाई के लिए ठेकेदार द्वारा उठाई ही नहीं जा सकी थी।

विभाग को डिस्पोजल चादरें 30 रुपए प्रति चादर के भाव से मिलने की जानकारी मिली। इसके बाद विभाग ने धौलपुर से ही एक हजार चादरें खरीदी हैं। गत कई दिनों से अब क्वारेंटीन व आईसोलेशन वार्डों में केवल डिस्पोजल चादरें ही काम में ली जा रही हैं। डीसीएमएचओ डॉ. सी.आर. मीना के अनुसार अब हम केवल डिस्पोजल चादरें ही काम में ले रहे हैं। यह सस्ती व धुलाई की कीमत के लगभग ही पड़ रही हैं।

suresh bharti Desk
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