Big issue: जबरदस्त टैंशन में हैं सब, टिकी हुई हैं 9/11 पर निगाहें

Big issue: जबरदस्त टैंशन में हैं सब, टिकी हुई हैं 9/11 पर निगाहें

raktim tiwari | Publish: Sep, 05 2018 08:22:00 AM (IST) Ajmer, Rajasthan, India

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रक्तिम तिवारी/अजमेर।

छात्रसंघ चुनाव की रंगत में डूबे कॉलेज और महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविलालय के युवाओं की नजरें 11 सितम्बर पर टिकी हैं। प्रत्याशी और उनके समर्थक चुनाव के दौरान बनाई रणनीति के आधार पर हार-जीत के कयास लगा रहे हैं। दो-तीन की छुट्टियों के बाद मंगलवार से सभी संस्थाओं में फिर चहल-पहल लौटेगी।

31 अगस्त को सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय, राजकीय कन्या महाविद्यालय, लॉ कॉलेज, संस्कृत कॉलेज, दयानंद कॉलेज और महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव पद के लिए मतदान हुआ। तीन दिन की छुट्टी होने से छात्र संगठनों के पदाधिकारी, प्रत्याशी और कार्यकर्ता नजर नहीं आए। ज्यादातर कॉलेज और विश्वविद्यालय में सन्नाटा सा पसरा रहा। अब मंगलवार से संस्थानों की कैंटीन, गलियारे और परिसर आबाद होंगे।

हार-जीत के दावे
निर्दलीय और एनएसयूआई, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्तार्आ और प्रत्याशी हार-जीत पर चर्चा में जुटे हैं। पिछले तीन दिन से सभी संस्थाओं में पारम्परिक जातीय वोट, कम मतदान, निर्दलीय प्रत्याशियों की चुनौती और अन्य बिन्दुओं का विश्लेषण किया गया। कई विद्यार्थी और प्रत्याशी अपने गांव चले गए हैं। अलबत्ता मोबाइल पर वे छात्र संगठनों के पदाधिकारियों, विद्यार्थियों से फीडबैक लेने रहे हैं।

9/11 को खुलेगी किस्मत

सभी संस्थाओं में 11 सितम्बर को मतगणना होगी। सबसे कम विद्यार्थी होने से संस्कृत कॉलेज, लॉ कॉलेज के नतीजे जल्द जारी होंगे। इसके बाद राजकीय कन्या महाविद्यालय, दयानंद कॉलेज, एमडीएस विश्वविद्यालय के परिणाम आएंगे। सबसे ज्यादा समय सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय में लगेगा। यहां 3534 विद्यार्थियों ने मतदान किया है। इसके चलते मतगणना देर शाम तक चलने की उम्मीद है।

बगावत और कम मतदान से चिंता

इस साल के छात्रसंघ चुनाव काफी रोचक हैं। एक तरफ टिकट नहीं मिलने से नाराज विद्यार्थियों ने एनएसयूआई और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से बगावत की है। उन्होंने दोनों छात्र संगठनों के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ जबरदस्त ताल ठोकी है। इससे छात्र संगठनों के पदाधिकारियों की नींद उड़ी हुई है। इसके अलावा संस्थाओं में कम मतदान से भी परेशानियां बढ़ गई हैं। हार-जीत में खास अन्तर रहने की उम्मीद नहीं है।

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