Survey: इंजीनियरिंग में घटी युवाओं की रुचि, उच्च शिक्षा में बढ़ीं गल्र्स

अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण की रिपोर्ट। केंद्रयी शिक्षा मंत्रालय ने जारी किए आंकड़े।

By: raktim tiwari

Published: 14 Jun 2021, 08:19 AM IST

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

उच्च और तकनीकी शिक्षा का परिदृश्य धीरे-धीरे बदल रहा है। कोरोना संक्रमण, सीमित नौकरियों और घिसे-पिटे पाठ्यक्रमों से इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में युवाओं की रुचि घट रही है। जबकि उच्च शिक्षा में बालिकाओं का ग्राफ बढ़ रहा है। अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण की रिपोर्ट में यह स्थिति सामने आई है। रिपोर्ट हाल में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने जारी की है।

इंजीनियरिंग में घट रहा रुझान
दस साल पहले तक इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कोर्स में युवाओं का सर्वाधिक रुझान था। लेकिन अब इससे उनका मोहभंग हो रहा है। साल 2015-16 ततक आईआईटी, एनआईटी और राज्य स्तरीय इंजीनियरिंग एवं कॉलेज में 4.56 करोड़ विद्यार्थियों ने प्रवेश लिए। यह 2018-19 में घटक 3.74 करोड़ तक पहुंच गया। साल 2019-20 में मामूली बढ़कर 3.85 करोड़ हुआ। साल 2020-21 में संख्या घटकर 37.2 करोड़ रह गई। इसके पीछे कोरोना संक्रमण के अलावा घिसे-पिटे पाठ्यक्रम, शोध-नवाचार में कमी और औद्योगिक मांग के अनुसार विद्यार्थियों को तैयार नहीं करना है।

कॉमर्स में लड़कों से आगे
कभी कॉमर्स संकाय में छात्रों का दबदबा रहता था। सीए-सीएस, बैंकिंग-इंश्योरेंस सेक्टर में छात्रों को रोजगार मिलते थे। शिक्षा मंत्रालय की सर्वेक्षण रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े आए हैं। 20015-16 तक सौ छात्रों पर 91 छात्राएं कॉमर्स संकाय में प्रवेश लेती थीं। अब छात्र-छात्राओं का आंकड़ा बराबरी पर पहुंच चुका है। 2020-21 तक बी.कॉम के पाठ्यक्रमों में 21.3 छात्राओं ने दाखिले लिए। जबकि छात्रों का आंकड़ा 20.3 लाख रहा है।

एमबीबीएस और विज्ञान में छात्राएं आगे
सर्वेक्षण रिपोर्ट में छात्राएं एमबीबीएस और बीएससी-एमएससी स्तर के कोर्स में छात्राओं से आगे बताई जा रही हैं। 2018-19 से कॉलेज/विश्वविद्यालयों के बीएससी-एमएससी स्तर के पाठ्यक्रमों में छात्र-छात्राओं की संख्या बराबर जा रही है। साल 2020-21 में तो बीएससी पाठ्यक्रमों में सौ छात्राओं पर 115 छात्राओं ने दाखिले लिए हैं। एमबीबीएस में भी सौ छात्रों पर करीब 105 छात्राएं प्रवेश ले रही हैं। यानि साफतौर पर छात्राओं ने मेडिकल और विज्ञान क्षेत्र में दबदबा कायम करना शुरू कर दिया है।

सीबीएसई में छात्राएं अव्वल...
सीबीएसई के 2005 से 2020 के बारहवीं-दसवीं के नतीजों में लगातार छात्राओं का दबदबा कायम है। छात्राओं का परिणाम 88.60 से बढ़ता हुआ 95 प्रतिशतक पहुंच चुका है। छात्रों का परिणाम 82 से 87 प्रतिश तक ही टिका हुआ है। बारहवीं के परिणाम का सीधा असर उच्च, तकनीकी, प्रबंधन और चिकित्सा संस्थानों में दाखिलों पर पड़ रहा है।

यूं बदल रहा है ग्राफ
-केंद्रीय/राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी
-इंजीनियरिंग/मैनेजमेंट क्षेत्र में नौकरियों का घटता ग्राफ
-औद्योगिक मांग के अनुसार संस्थान नहीं कर रहे विद्यार्थी
-छात्राओं की कार्यदक्षता और टीम वर्क छात्रों से बेहतर
-हायर डिग्री लेने में छात्राओं का छात्रों से रुझान ज्यादा


उच्च, तकनीकी अथवा अन्य क्षेत्रों में डिग्री और नौकरियों में निश्चित तौर पर छात्राओं का रुझान बढ़ रहा है। यह परिदृश्य भविष्य में और बदलेगा। बेहतरीन शिक्षण सुविधाएं, अच्छे संस्थानों की स्थापना और जागरुकता से युवाओं को फायदा मिल रहा है। जिन क्षेत्रों में कमियां हैं, तो उन्हें सुधार की आवश्यकता होनी चाहिए।
प्रो. शिवप्रसाद, मैनेजमेंट और कॉमर्स विभागाध्यक्ष, मदस विवि

raktim tiwari Reporting
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