दो साल से कैद हैं अलमारी में, बाहर निकालने की नहीं फुर्सत

दो साल से कैद हैं अलमारी में, बाहर निकालने की नहीं फुर्सत

raktim tiwari | Publish: May, 18 2019 06:32:00 AM (IST) Ajmer, Ajmer, Rajasthan, India

दो साल से ज्यादा वक्त बीत चुका है। नियमानुसार विश्वविद्यालय को नए फार्म भरवाने पड़ेंगे।

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय को शिक्षक भर्तियों के लिए नए सिरे से आवेदन मांगने पड़ेंगे। अव्वल तो कई विषयों में तो शैक्षिक मानदंड के अनुरूप आवेदन नहीं मिले हैं। उधर आवेदन लिए दो साल से ज्यादा वक्त बीत चुका है। नियमानुसार विश्वविद्यालय को नए फार्म भरवाने पड़ेंगे।

विश्वविद्यालयय में विभागवार 20 शिक्षकों की भर्ती होनी है। इनमें विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कला और अन्य संकाय के विषय शामिल हैं। जूलॉजी और बॉटनी विभाग के प्रोफेसर की भर्ती साल 2017 में हुई थी। विश्वविद्यालय को कई विषयों में योग्य आवेदन नहीं मिले हैं। कई आवेदकों के रिसर्च पेपर गुणावत्ताविहीन पाए गए। कुछ आवेदकों के स्नातक-स्नातकोत्तर स्तर पर तृतीय श्रेणी अंक ही मिले। ऐसे में योग्य आवेदकों का टोटा हो गया है।

बीत गए हैं दो साल
विश्वविद्यालय ने 22 शिक्षकों की भर्ती के लिए साल 2016 में अक्टूबर-नवम्बर में फार्म भरवाए थे। इनमें से जूलॉजी-बॉटनी को छोडकऱ अन्य भर्तियां अटकी हुई हैं। नियमानुसार आवेदन आवेदनों को लम्बे अर्से तक रखा नहीं जा सकता है। ऐसे में कई विषयों में विश्वविद्यालय को नए सिरे से फार्म भरवाने जरूरी होंगे।

यूजीसी ने बनाए नए नियम

यूजीसी ने विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर, रीडर और लेक्चरर पद पर भर्ती के लिए नियम बनाए है। इनमें राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय जर्नल्स की सूची के अनुरूप शिक्षकों के रिसर्च पेपर की जांच, पीएचडी/नेट, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर संबंधित विषय में प्राप्तांक और अन्य शामिल हैं।

इन विभागों में होनी है भर्ती (विवि के अनुसार)
प्रोफेसर- इकोनॉमिक्स, प्योर एन्ड एप्लाइड केमिस्ट्री

रीडर-बॉटनी (2), इकोनॉमिक्स (1), भूगोल (1), इतिहास (2), गणित (1), राजनीति विज्ञान (2), प्योर एन्ड एप्लाइड केमिस्ट्री (1), समाजशास्त्र (1), जूलॉजी (2)
लेक्चरर-कम्प्यूटर एप्लीकेशन (1), भूगोल (1), प्योर एन्ड एप्लाइड केमिस्ट्री (1), समाजशास्त्र (1), जूलॉजी (1)

आरपीएससी से भर्ती क्यों नहीं...

विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भर्तियों कभी नियमित नहीं हुई हैं। कभी आरक्षण तो कभी अन्य कारणों से भर्तियां अटकती हैं। इस मामले में तत्कालीन कार्यवाहक राज्यपाल ए.आर. किदवई ने साल 2007 में सरकार को पत्रावली भेजी थी। उन्होंने विश्वविद्यालयों में शिक्षक भर्तियों में होने वाली गड़बडिय़ों का हवाला दिया था। साथ ही प्रोफेसर, रीडर और लेक्चरर्स की भर्तियां राजस्थान लोक सेवा आयोग के जरिए कराने को कहा था। लेकिन 11 साल में किसी सरकार ने इस पर विचार नहीं किया है।

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