Teachers recruitment: खत्म हुई अनुपस्थित रहे अभ्यर्थियों की काउंसलिंग

विषयों में अनुपस्थित रहे अभ्यर्थियों को अंतिम मौका दिया गया था। अभ्यर्थियों के वांछित दस्तावेजों की जांच की गई।

By: raktim tiwari

Published: 15 Nov 2020, 06:03 PM IST

अजमेर.

राजस्थान लोक सेवा आयोग में प्राध्यापक-(स्कूल शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा-2018 के तहत अनुपस्थित रहे अभ्यर्थियों की काउंसलिंग खत्म हो गई। छह विषयों की काउंसलिंग में किसी कारण से अनुपस्थित अभ्यर्थियों को अंतिम अवसर दिया गया था।

सचिव शुभम चौधरी ने बताया कि आयोग परिसर में छह विषयों की काउंसलिंग 5 से 26 अक्टूबर तक भूगोल, जीव विज्ञान, अर्थशास्त्र, लोक प्रशासन, संगीत, राजनीति विज्ञान विषय की काउंसलिंग हुई थी। इसमें किसी कारण से अनुपस्थित रहे अभ्यर्थियों की काउंसलिंग 26 से 29 अक्टूबर तक कराई गई थी। इन विषयों में अनुपस्थित रहे अभ्यर्थियों को अंतिम मौका दिया गया था। अभ्यर्थियों के वांछित दस्तावेजों की जांच की गई।
अब पदस्थापना की तैयारी
काउंसलिंग का काम पूरा हो चुका है। दिवाली बाद प्राध्यापक भर्ती में शामिल अभ्यर्थियों की पदस्थापना को लेकर शिक्षा
विभाग कार्रवाई शुरू करेगा।

पटाखों पर रोक से राहत, दिवाली पर घटा 55 प्रतिशत वायु प्रदूषण

अजमेर. कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए पटाखे चलाने पर लगी रोक अजमेर के लिए फायदेमंद साबित हुई। इस बार दिवाली पर पटाखों से होने वाले प्रदूषण में 55 प्रतिशत की कमी आई। सांस-दमा और अन्य रोगियों काफी राहत मिली। हालांकि दोपहिया-चौपहिया वाहन दौडऩे से वायु प्रदूषण बरकरार रहा।

दिवाली पर लोग हर साल करोड़ों रुपए के सूतली बम, अनार, फुलझड़ी, रॉकेट और अन्य पटाखे चलाते हैं। इससे होने वाला वायु और ध्वनि प्रदूषण खतरनाक होता है। महालक्ष्मी पूजन और राम-राम को पटाखे चलाने से अजमेर में 82.5 से 90 प्रतिशत तक प्रदूषण होता रहा है। हवा में बारूद के पाउडर और कचरे की गंध घुली रहती है। लेकिन कोरोना संक्रमण इस बार शहर के लिए फायदेमंद साबित हुआ।

55 प्रतिशत कम रहा प्रदूषण
एनजीटी की सख्ती और कोरोना संक्रमण के चलते राज्य सरकार ने इस बार पटाखे चलाने-बेचने पर पाबंदी लगाई। इसका अजमेर सहित अन्य शहरों-कस्बों-गांवों में असर देखने को मिला। रोक के बावजूद दिवाली की रात 9 से 1 बजे तक कई लोगों ने पटाखे चलाए, पर इनकी तादाद 20 से 25 प्रतिशत ही रही। वायु प्रदूषण में पटाखों से निकलने वाले घातक धुएं की मात्रा 55 प्रतिशत तक कम रही। अजमेर में संभवत: बीते 10-15 साल में ऐसा पहली बार होगा जबकि दिवाली पर प्रदूषण कम हुआ है।

raktim tiwari Reporting
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