खाद्य पदार्थों में मिलावट का कारोबार फैला,छापे,बरामद व कानूनी कार्रवाई के बावजूद आरोपी बेखौफ

अजमेर जिले में कई बार छापे में मिलावटी खाद्य पदार्थ बरामद किया,इसके बावजूद पूरी तरह नहीं अंकुश,चूरू में एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी सेवानिवृत्त, दूसरा एपीओ

By: suresh bharti

Published: 12 Sep 2020, 11:32 PM IST

अजमेर/चूरू. मिलावट का खेल कभी बंद होता नहीं दिख रहा। खाद्य पदार्थों में मिलावट का घालमेल पूरे प्रदेश में चरम पर है। दूध, घी, मावा, मसाला, खाद्य तेल, शराब, डीजल-पेट्रोल के अलाव अब तो भवन निर्माण की बजरी में भी रेता मिलाया जा रहा है।

मावा निर्मित मिष्ठान शुद्ध मिल जाए। यह असंभव है। कोरोना काल में मिलावट का यह अवैध धंधा बंद रहा। अनलॉक के बाद बाजार में मिलावटी सामान की बिक्री अचानक बढ़ गई है। पिछले दिनों में प्रदेश में खाद्य सामग्री में मिलावट व अवधि पार सामान बेचने की शिकायतों पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्रवाई भी की गई है। इसके विपरीत अजमेर व चूरू जिले में पिछले करीब एक माह से मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। चूरू जिले में इन दिनों एक भी अधिकारी नियुक्ति नहीं है।

अनलॉक में मिलावट का खुला खेल

हालांकि लॉकडाउन के दौरान मिठाई व्यवसाय कम ही चल पाया था, लेकिन अनलॉक में छूट देने के साथ ही अब धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ऩे लगा है। सावों सहित आयोजन में भी सरकार ने गाइडलाइन निर्धारित कर कुछ राहत दी है। ऐसे में सिंथेटिक मावे की सप्लाई से भी इंकार नहीं किया जा सकता। पहले मिलावट रोकने के लिए चूरू जिले में दो खाद्य सुरक्षा अधिकारी नियुक्त थे, जो कि सैम्पल लेने का काम कर रहे थे। एक अधिकारी फरवरी माह में सेवानिवृत्त हो चुका है। वहीं दूसरे को करीब 25 दिन पहले एपीओ कर जयपुर उपस्थिति देने के निर्देश हैं। तब से जिले में दोनों पद खाली चल रहे हैं।

श्राद्ध पक्ष में खूब बिकती है मिठाई, आगे दीवाली

जानकारों की मानें तो श्राद्ध पक्ष के दौरान मिठाइयों की बिक्री बढ़ गई है। पितरों को भोग लगाने सहित पंडितों को भोजन में विशेष तौर पर मिठाई परसोने का विशेष महत्व है। आने वाले दिनों में नवरात्र, दीवाली व शादियों का सीजन शुरू हो जाएगा। इस सीजन में बाजार में बड़ी मात्रा में सिंथेटिक मावे से बनी मिठाइयां बनती है।

मुनाफे के चक्कर में व्यापारियों की ओर से खाद्य वस्तुओं में मिलावट की जाती रही है। बड़ा सवाल यह है कि इन्हें रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारी के नहीं होने पर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है। जानकारों की माने तो बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों में दूध व इससे निर्मित मिष्ष्ठान व मसालों की सर्वाधिक खपत के चलते इनमें अधिक मिलावट की जाती है।

अब तक लिए 120 सैम्पल

चूरू के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो इस वर्ष जनवरी से लेकर अगस्त माह तक करीब 120 सैम्पल लिए गए थे। इसमें सभी की रिपोर्ट आ चुकी है। जांच के दौरान 21 सैम्पल अमानक पाए गए हैं। गाइड लाइन के मुताबिक हर माह औसत 20 सैम्पल लिए जाते हैं, त्योहारी सीजन में बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाता है। लेकिन जिले में खाद्य सुरक्षा अधिकारी नहीं होने पर सैम्पल का काम ठप पड़ा हुआ है।

60 लाख की मशीनों पर जमी धूल

खाद्य पदार्थों में होने वाली मिलावट की जांच के लिए चूरू जिला मुख्यालय पर 40 लाख खर्च कर प्रयोगशाला बनाई गई थी। इसमें करीब 60 लाख की अत्याधुनिक मशीनें भी हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में बक्सों में रखी मशीनों पर धूल जमा हो गई है। वर्ष 2018 में बनी प्रयोगशाला में छह लोगों के स्टॉफ की आवश्यकता है, लेकिन फिलहाल एक भी कार्यरत नहीं है।

suresh bharti Desk
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