scriptThe mother kept on heating the bonfire for the whole night with coughi | खांसते-सिसकते दुधमुंहे को लिए रातभर अलाव तापती रही मां. . .! | Patrika News

खांसते-सिसकते दुधमुंहे को लिए रातभर अलाव तापती रही मां. . .!

रात में 3 बजे भी चार माह के बीमार शिशु के लिए अलाव में लकडिय़ां झोंकती रही मां, सर्दी का सितम, गरीब व झोंपड़ पट्टी के बाशिंदों पर संकट

अजमेर

Updated: December 23, 2021 02:36:02 am

चन्द्र प्रकाश जोशी

अजमेर. चार माह के मासूम की दिल को चाक करने वाली सिसकारियां. .हाड़ कंपाती सर्दी में खांसी से बेहाल जिगर का टुकड़ा. . और इससे फटता मां का कलेजा. . .! . . .लेकिन वो मां है. .औलाद के लिए सबकुछ और खुद के लिए कुछ नहीं! मासूम की पीड़ा नहीं देखी गई तो उसे गोद में लिया और पुरानी-सी शॉल में समेट कर रातभर अलाव तापती रही। सर्दी इतनी तेज की हाड़ कंपा दे. .मगर मां अपनी औलाद के लिए रातभर अलाव में लकडिय़ां झोंकती रहकर सुबह के इंतजार में दुधमुंहे बीमार शिशु को सर्दी से बचाने का जतन करती रही। बुधवार तड़के 3 बजे पत्रिका ने उसके परिवार की पीड़ा को नजदीक से महसूस किया।
खांसते-सिसकते दुधमुंहे को लिए रातभर अलाव तापती रही मां. . .!
खांसते-सिसकते दुधमुंहे को लिए रातभर अलाव तापती रही मां. . .!
पुष्कर रोड पर मित्तल हॉस्पिटल से सिने वल्र्ड के मध्य खाली भूखण्ड किनारे झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाले परिवार के पास सर्दी से ठिटुरते रहने के अलावा कोई चारा नहीं था। खांसी से जकड़े व सर्दी में ठिठुरते बच्चे को गोद में लेटाकर अलाव की आंच से गर्मी का अहसास कराती मां मंजू की आंखों में आंसू थे। उसने बताया कि हमारे पास कंबल-रजाई कम है। बच्चे को खांसी तेज है। सर्दी से परेशान हैं इसलिए रात 12 बजे बाद ही अलाव जला लिया। रात्रि करीब 3 बजे भी अलाव जलाकर बैठे रहे कि रात चढऩे के साथ बढ़ती सर्दी में अलाव की गर्मी से बच्चे को भी खांसी-सर्दी से कुछ राहत मिले। . . अब सुबह का इंतजार है. .धूप निकलने पर दिन में सो जाएंगे।
कबाड़ बीनकर करते हैं गुजर. .

परिवार के दो पुरुष व महिला ने बताया कि वे सड़कों के किनारे कबाड़, गत्ते, बोतलें आदि बीनकर कबाड़ी को बेचते हैं। इससे जो कुछ मिलता है उससे परिवार का खर्च चलाते हैं। सर्दी से बचाव के लिए पर्याप्त गर्म कपड़े नहीं हैं।
मूल रूप से बीकानेर का यह परिवार लम्बे समय से इसी तरह यहां-वहां झुग्गी-झोंपड़ी बनाकर रहता है। कबाड़ का काम करने पर बताते हैं कि प्लास्टिक, गत्ते आदि इक_ा कर कबाड़ में बेचने से काम चल रहा है।

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