अनदेखी के चलते खेल मैदान अतिक्रमण का शिकार

विद्यालय में संचालित नहीं होती कोई खेल गतिविधि , प्रशासन और नपा के सहयोग से कई बार कराया गया है अतिक्रमण मुक्त

शहर का राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का खेल मैदान पर पिछले काफी समय से अतिक्रमण है। विद्यालय के बेशकीमती खेल मैदान पर दबंगों का कब्जा है, जो लगातार मैदान को अतिक्रमण का शिकार बना रहे है। लेकिन इसे विद्यालय प्रशासन की लापरवाही कहें या छात्र छात्राओं का दुर्भाग्य कि प्रदेश में सबसे अधिक छात्र संख्या वाले विद्यालय में गैर शैक्षणिक गतिविधियों का अभाव है।

By: Dilip

Published: 23 Dec 2020, 11:45 PM IST

बाड़ी. शहर का राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का खेल मैदान पर पिछले काफी समय से अतिक्रमण है। विद्यालय के बेशकीमती खेल मैदान पर दबंगों का कब्जा है, जो लगातार मैदान को अतिक्रमण का शिकार बना रहे है। लेकिन इसे विद्यालय प्रशासन की लापरवाही कहें या छात्र छात्राओं का दुर्भाग्य कि प्रदेश में सबसे अधिक छात्र संख्या वाले विद्यालय में गैर शैक्षणिक गतिविधियों का अभाव है।

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय किला, जिसमें करीब 2000 छात्र -छात्रा नामांकित हैं। छात्र संख्या के आधार पर प्रदेश के टॉप टेन स्कूल में शामिल है। जिसका परीक्षा परिणाम भी उत्कृष्ट रहता है। विद्यालय प्रधानाचार्य और स्कूल स्टाफ शायद ही इसे एक वर्ष में एक या दो बार देखने जाता हो। ऐसे में बच्चे उस खेल मैदान में कैसे प्रशिक्षण लेंगे। जिसके चलते यह विद्यालय केवल स्कूली शिक्षा में अध्ययन कार्य तक ही सीमित होकर रह गया है।

यहां के बालक स्टेट या नेशनल लेवल पर किसी भी खेल प्रतियोगिता में भाग नहीं लेते है। विद्यालय का खेल मैदान विद्यालय से कुछ दूरी पर दक्षिण दिशा में स्थित है, जो शहर के बीचोंबीच होने के चलते बेशकीमती भूमि है।

दबंगों का कब्जा

जो स्थायी और अस्थायी दोनों प्रकार का है। कई बार नगर पालिका द्वारा शहर के नागरिकों और खेल प्रेमियों की मांग पर स्थानीय प्रशासन के सहयोग से इस खेल मैदान को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। अतिक्रमण मुक्त कराने के साथ.साथ साफ -सफाई कराकर इसे विद्यालय प्रशासन को सौंपा है, लेकिन हर बार विद्यालय प्रशासन की उदासीनता और लापरवाही के कारण खेल मैदान अतिक्रमण का शिकार हो जाता है इसमें पशुओं के गोबर के साथ बबूल, कटीली झाडिय़ों और खरपतवार उग आती है।

कई लोगों ने तो अब मैदान के ठीक बीच में से आने जाने के लिए रास्ता भी बना लिया है। ऐसे में लगता नहीं है कि विद्यालय प्रशासन इस खेल मैदान को लेकर चिंतित रहा हो या वर्तमान में चिंतित दिखाई दे रहा हो।

पत्रिका ने पहले भी किया है मामला उजागर

खेल मैदान को लेकर अगस्त माह में पत्रिका में समाचार प्रकाशित किया गया था, जिसको लेकर उस समय के जिला शिक्षा अधिकारी महेश रिजवानी ने विद्यालय प्रशासन को नोटिस देकर जांच की बात कही थी लेकिन वह नोटिस फाइलों में ही दब कर रह गया। 5 महीने बाद भी मैदान अतिक्रमण का शिकार है। विद्यालय प्रशासन ने उसे देखना तक मुनासिब नहीं समझा है। ऐसे में खेल मैदान पर लगातार अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned