टैक्स चोरी बताकर भारी भरकम पैनेल्टी से बचाने की एवज में फर्जी सीटीओ ने ठगे सवा दो लाख रुपए

अजमेर व नागौर के व्यापारियों को बनाया शिकार, तीन साथी फर्म में जाकर डराने धमका कर ऐंठते हैं रकम,अचानक किसी फर्म के यहां पहुंच कर अफसर की तरह करते हैं बात

By: suresh bharti

Published: 15 Jan 2021, 01:03 AM IST

अजमेर. फर्जी वाणिज्यिक अधिकारी बन लाखों रुपए ठगने वाला गिरोह इन दिनों सक्रिय है। हाल ही इन लोगों ने खुद को वाणिज्य कर विभाग का अधिकारी बताते अजमेर व नागौर जिले के कई व्यापारियों को निशाना बनाया। गिरोह ने व्यापारियों को डरा धमका कर करीब 2.25 लाख रुपए की ठगी को अंजाम दिया। व्यापारियों की ओर से अज्ञात ठगों के खिलाफ ब्यावर, जसनगर व पादुकलां पुलिस थानों में रिपोर्ट दी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

भारी भरकम पैनल्टी लगाने की धमकी

राज्य कर विभाग के अतिरिक्त आयुक्त (प्रशासन) रामनिवास शर्मा ने बताया कि गत दिनों ठगों ने मेड़ता के जस नगर स्थित नवदुर्गा स्टोर के प्रोपराइटर बाबूलाल टांक को वाणिज्यि कर विभाग का अधिकारी बताया व फर्म के दस्तावेज दिखाने को कहा। व्यापारी को कई कमियां बताते हुए भारी भरकम पैनल्टी लगाने की धमकी दी। बाद में व्यापारी से 75 हजार रुपए लेकर मौके से फरार हो गए।

इसी तरह ब्यावर के भोमाजी का थान स्थित हार्डवेयर व्यवसायी पुष्पेन्द्र पंवार की फर्म पर पहुंचे ठगों ने सर्वे के नाम पर फर्म के दस्तावेज जांचे और उससे पांच लाख रुपए पैनल्टी लगाने की बात कही। व्यापारी ने इधर उधर से एक लाख रुपए का इंतजाम कर उन्हें दे दिए। इसी प्रकार एक अन्य मामले में पादूकलां के एक व्यापारी से भी फर्जी अधिकारी बन 50 हजार रुपए की रकम ऐंठ ली गई। ब्यावर के निकट निमाज के एक हार्डवेयर व्यवसायी से भी रकम ऐंठी गई है।

लिखित दस्तावेजों से अधिकारी को करें तस्दीक

ठगी की वारदातों के बाद विभाग ने गुरुवार को एक सूचना जारी करते हुए आमजन व व्यापारियों को सावचेत किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी व्यक्ति खुद को अधिकारी बताता है तो पहले उससे दस्तावेज मांग कर संतुष्टि प्राप्त कर लें। उसके बाद ही उसे सर्वेक्षण की अनुमति दें। विभाग का नाम लेकर कोई व्यक्ति प्रतिष्ठान की जांच करने पहुंचता है तो उससे विभाग की सर्वेक्षण की लिखित अनुमति मांगें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो कर व शास्ति नकद देने का प्रावधान नहीं है। यह कार्य विधिक प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन होता है।

suresh bharti Desk
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