VC trap: हर काम का दाम, परत दर परत खुल रहा रामपाल का घूसकांड

सीट बढ़ोतरी के अलावा विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति पर नजरें गढ़ाए था। एसीबी ने इस चैटिंग को भी सैटिंग का आधार बनाया है।

By: raktim tiwari

Published: 19 Sep 2020, 05:58 AM IST

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

अजमेर. महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के घूसकांड की परतें काफी गहरी हैं। निलंबित कुलपति आर. पी. सिंह का दलाल हर मामले में कॉलेज संचालकों से डील करता था। वह परीक्षा केंद्र, सम्बद्धता, सीट बढ़ोतरी के अलावा विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति पर नजरें गढ़ाए था। एसीबी ने इस चैटिंग को भी सैटिंग का आधार बनाया है।

चाहे कम कर लो, औरों से तो दिलवाओ...
1 जुलाई 2020, 15:54:24 पर रणजीत के मोबाइल ( 7599347117) से विवेक के मोबाइल (9887140960) पर बातचीत होती है। रणजीत कहा है...आप आए नहीं मेरे पास। विवेक कहता है...दूसरों से भी मिल लूं...। रणजीत कहता है....मदरलैंड, पन्नाधाय, बंसल वाले, अभिज्ञान, नेहरू की पत्रावलियां आ चुकी हैं....। विवेक कहता है...मेरी विवेक की फाइल 15-20 दिन से अटकी है..पीए ने रोक रखी है। 14-15 में 90 हजार की पेनल्टी लगाई है....। रणजीत कहता है....आप लोग कब आ रहे हो आर कितने लोग आ रहे हो....। विवेक कहता है....10-15 लो आ जाते हैं...। रणजीत कहता है.....छात्रवृत्ति के एफिलेशन के लिए क्या अमाउन्ट डिसाइड करोगे....।

आप अपना चाहे कम कर लो...औरों से तो दिलवाओ।
रणजीत कॉलेज संचालकों से मोबाइल चैटिंग और निजी मुलाकातमें मनचाहे दाम वसूल रहा था। 29 जून 2020, 12:39:10 को हुई बाचतीत में इसकी रिकॉर्डिंग है। रणजीज के मोबाइल (9837755554) से अमिनेष के मोबाइल (7726863838) पर बातचीत हुई। अमिनेष..मैं यूनिवर्सिटी आया हुआ था, मिल लेते...मेरे साथ साहब भी है। मैंने एप्लीकेशन भी लगवा दी आज फाइल वगैरह। रणजीत...मिल तो लिया था बात हो गई थी....। अनिमेष कहता है...साढ़े छह ज्यादा है.....। रणजीत कहता है.......अच्छा मैं फोन पर ऐसी बात नहीं कर रहा..मैं मिलता हूं...अभी फोन करता हूं।

बंगले पे ही आ जाओ....वीसी हाउस
केस के हिसाब से कॉलेज संचालकों से रकम वसूली जा रही थी। राशि लेने का प्रमुख केंद्र था कुलपति का बंगला। एसीबी ने इसे ही टार्गेट में रखा। 25 जून 2020 को 16:20:59 पर रणजीत सिंह के मोबाइल से अनिमेथ की बातचीत हुई। अमिनेष कहता है......सर यूनिवर्सिटी आ गया था, कहां आऊं? रणजीत कहता है...बंगले पे ही आ जाओ...., अमिनेष.....वी.सी. हाउस ही ना? इस पर रणजीत सहमति देते हुए कहता है...हां। मालूम हो कि एसीबी ने 7 सितंबर कुलपति निवास से ही 2.20 लाख की रिश्वत के साथ रणजीत, कॉलेज प्रतिनिधि महिपाल और आर. पी.सिंह को गिरफ्तार किया था।

10 कॉलेज से 50-50, 60-60 हजार
विवि में आर.पी. सिंह का दलाल रणजीत जमकर भ्रष्टाचार कर रहा था। वह मोबाइल पर ही काम के अनुसार दाम बताता था। एसीबी की रिकॉर्डिंग में इसका खुलासा किया गया है। 24 जून 2020, 13:49:05 बजे रणजीत के मोबाइल पर अनिवाश के मोबाइल नंबर (9828535253) के ***** बातचीत हुई। रणजीत अविनाश कोदामदोर द्वारा 1.5 लाख देकर जो और बकाया बाद देने को कहता है। अविनाश कहता है...आदेश करने और परमानेंट एनओसी आने पर मिलते हैं। रणजीत कहता है....वर्कलोड पर 50-50-60-60 हजार 10 कॉलेज से इक्टठे करके आकर मिलना। एएससी के मामले में मनमुताबिक पैनल लगाने का आश्वासन देता है।

raktim tiwari Reporting
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