Vc trap case: मैं दे आया फाइल का पैसा, सर देंगे परमानेंट एफिलेशन..

मोबाइल पर होती थी कॉलेजों से बेखौफ डील। रिकॉर्डिंग और बातें एसीबी की एफआईआर में दर्ज है।

By: raktim tiwari

Updated: 16 Sep 2020, 05:41 AM IST

अजमेर.

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के घूसकांड में निलंबित कुलपति आर. पी. सिंह, उसका दलाल रणजीत और उनके नेटवर्क में शामिल लोग बेखौफ होकर कॉलेज संचालकों से डील कर रहे थे। 15-20 हजार से लाखों रुपए की डील मोबाइल पर फिक्स होती थी। यह रिकॉर्डिंग और बातें एसीबी की एफआईआर में दर्ज है।

1 जुलाई 2020 को 4.01:12 बजे रणजीत सिंह के मोबाइल नंबर (7599347117) से राजेंद्र चौधरी के मोबाइल (9829084423) पर बातचीत हुई। इसमें राजेंद्र कहता है....पहले चार-पांच कॉलेज का पैसा एक लाख रुपए दिया था, जो कम ही नहीं किया। इस पर रणजीत कहता है...रजिस्ट्रार पैनल और सीट का एक लाख रुपए मांग रहा है, वो सब काम करा देगा। मैं दो फाइल का पैसा दे भी आया उसको....सर तो परमानेंट एफिलेशन देंगे.....।

ठीक है पचास, तीस, बीस होगा....
आर. पी. सिंह और उसके दलाल रणजीत का पूरा फोकस कॉलेज के एफिलेशन, सीट अभिवृद्धि और परीक्षा केंद्र पर टिका था। वे पूरी तरह कॉलेज संचालकों की अटकी और नवीन पत्रावलियों पर ध्यान केंद्रित किए हुए थे। राजेंद्र और रणजीत के बीच हुई बातचीत एसीबी के एफआईआर में है। एक जगह राजेंद्र कह रहा है...सर कौन देगा इतना पैसा....इस पर रणजीत कहता है....अरे भैया लोग देकर गए है। राजेंद्र फिर कहता है.....रजिस्ट्रार अकेला खा रहा है..। रणजीत कहता है...अकेला नहीं खा रहा....। तब राजेंद्र कहता है....तब ठीक है, पचास, तीस बीस होगा....?

नहीं था किसी का भी डर....
विश्वविद्यालयों में कॉलेजों से खुलकर डील हो रही थी। दलाल रणजीत और आर. पी.सिंह ने पूरा नेटवर्क बना लिया था। निजी कॉलेज संचालकों की पत्रावलियां दूध देने वाली गाय बन चुकी थीं। एक जगह बातचीत में राजेंद्र कहता है..भय होना चाहिए...टेरर तो होना ही चाहिए....। रणजीत कहता है..आप जैसा कह रहे हो, वैसा कर लेंगे....। रणजीत कहता है...नहीं चौहान से नहीं अपने ने एक नया आदमी अॅपाइंट कर लिया है..रवि जोशी, उसते बात करवा देता हूं। तत्पश्चात कॉलेज का नाम बताता है, जिसकी फाइल प्राप्त हो चुकी है।

raktim tiwari Reporting
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