जान का बैरी न बने धीमा जहर

टिप्पणी

सीवरेज और केमिकलयुक्त पानी से तैयार हो रही सब्जियां

By: dinesh sharma

Published: 08 Dec 2019, 08:45 PM IST

दिनेश कुमार शर्मा

अजमेर.

किसी की हंसती-खेलती जिंदगी में जहर घोलना कहां तक उचित ठहराया जा सकता है। भगवान की बनाई इस खूबसूरत दुनिया में जीने का हक सबको है, लेकिन कुछ लोग चंद रुपयों के लालच में दूसरों की जिंदगी से खेल रहे हैं।

अपने मुनाफे के लिए दूसरों को स्लो पॉइजन दिया जा रहा है। दुखद पहलू तो यह है कि जिन्हें यह पॉइजन दिया जा रहा है वो इसे अपने लिए स्वास्थ्यवद्र्धक मानकर हंसी-खुशी खुद स्वीकार कर रहे हैं।

और तो और इसके लिए मोल-भाव कर रकम भी खुद ही तय कर रहे हैं। यह डर्टी पिक्चर है स्मार्ट सिटी में शुमार हो चुके अजमेर शहर की, लेकिन अन्य शहरों के हालात भी कुछ जुदा नहीं हैं।

जहां नालों के गंदे पानी में सब्जियां उगाई जा रही हैं। कुछ लोग अपने लाभ के लिए दूसरों की रगों में हैवी मेटल्स और घातक रसायन पहुंचा रहे हैं। अनदेखी की अति तो यह है कि यह सब जिम्मेदारों की आंखों के सामने हो रहा है।

इससे न जिला प्रशासन अन्जान है, न चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महकमा और न रसद विभाग सहित अन्य जिम्मेदार। सबकी आंखों पर पट्टी बंधी है, या यूं कहें की कुंभकर्णी निद्रा में हैं।

यह हालात तब हैं जब एनजीटी की ओर से सीवरेज के पानी में सब्जियों की खेती पर रोक लगाई गई है। प्रदेश के मुखिया खुद गत दिनों मिलावट को धीमा जहर बताते हुए इसके लिए सख्त सजा की बात कह चुके हैं।

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फिर जिंदगी में जहर घोलने की यह खुली छूट क्यों ? सवाल यह भी उठता है कि यह धोखाधड़ी हम कर किस-किस के साथ रहे हैं। धरती माता जिसकी उर्वरा शक्ति इस केमिकलयुक्त पानी से घट रही है।

या वो बेकसूर जो इस जहरीले पानी में उगी सब्जी को खाकर जान जोखिम में डाल रहा है। या फिर खुद अपने साथ जिसमें हम जानते-बूझते किसी को जहर परोस रहे हैं। जिंदगी से जंग के लिए सबको जागरूक होना होगा।

उस किसान को भी जो इस जहरीली सब्जी को खुद न खाकर दूसरों की रसोई में पहुंचा रहा है। वह बोरिंग कराकर भू-जल से भी खेती कर सकता है। उस खरीदार को भी जागरूक होना होगा जो जूते और चप्पल तो शोरूम से खरीद रहा है और सस्ती के चक्कर में सब्जी नाले या नाली किनारे से।

और उस प्रशासन को भी जिसे खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मिलावट पर सख्त सजा के लिए ताकीद कर चुके हैं। बहरहाल सांसों के इस संकट पर जिम्मेदारी सबको लेनी होगी। सरकार को, प्रशासन को और किसान को भी, क्योंकि जीने का हक सबको है और किसी की जिंदगी में जहर घोलने का हक किसी को नहीं।

dinesh sharma
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