गांव दरियापुर 36 घंटे तक चला अंधविश्वास का ड्रामा

सर्पदंश से पिता-पुत्र की मौत मामला , सदर थाने के गांव दरियापुर का मामला

यहां सदर थाने के गांव दरियापुर में रविवार अल सुबह घर पर सो रहे पिता-पुत्र की सर्पदंश से मौत हो गई। पिता-पुत्र की मौत के बाद गांव में ३६ घंटे तक अंध विश्वास का ड्रामा चला। आखिरकार सोमवार शाम मौके पर पहुंचे पुलिस दल ने मृतकों के शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल के शवगृह में पहुंचाया। तब कहीं जाकर अंध विश्वास का ड्रामा गांव में समाप्त हो सका।

By: Dilip

Updated: 14 Sep 2020, 11:24 PM IST

धौलपुर. यहां सदर थाने के गांव दरियापुर में रविवार अल सुबह घर पर सो रहे पिता-पुत्र की सर्पदंश से मौत हो गई। पिता-पुत्र की मौत के बाद गांव में ३६ घंटे तक अंध विश्वास का ड्रामा चला। आखिरकार सोमवार शाम मौके पर पहुंचे पुलिस दल ने मृतकों के शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल के शवगृह में पहुंचाया। तब कहीं जाकर अंध विश्वास का ड्रामा गांव में समाप्त हो सका।

सोते समय सांप ने काटा था

उल्लेखनीय है कि रविवार अल सुबह करीब साढ़े ४ बजे गांव में रहने वाले महेश कुमार(४०) को सांप ने कान के पास काटा और उसकी नींद खुल गई, फिर उसने देखा कि सांप उसके कान से चिपका हुआ है और खून बह रहा है. महेश ने तुरंत ही सांप को पकडक़र दूर फेैं क दिया। हल्ला सुन परिजन व आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उसे झाड़ फूंक के लिए गांव के बरीपुरा ले गए।

थोड़ी देर बाद खबर आई कि महेश के पुत्र विनीत(१८) को भी सांप ने काट लिया है। ग्रामीण घायल विनीत को लेकर अस्पताल पहुंचे, यहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद परिजन विनीत के शव को लेकर गांव पहुंच गए। इसके बाद कुछ देर बाद महेश की इलाज के अभाव में मौत हो गई। सूचना मिलने पर रविवार देर शाम को वन विभाग का दल गांव में पहुंचा और सांप की तलाश शुरू कर दी, लेकिन देर रात तक सुराग नहीं लगने पर दल वापस लौटा। इस दौरान देर रात तक मृतकों के परिजन शवों को लेकर आसपास के गांवों के चक्कर लगाते रहे।
मौत के बाद शुरू हुआ अंध विश्वास का ड्रामा

सोमवार सुबह जब गांव दरियापुर में सांप की तलाश में वन विभाग का दल रेस्क्यू कर रहा था। इस दौरान दल को धौलपुर शहर के रीको क्षेत्र में सांप होने की सूचना मिली। जब दल गांव दरियापुर से रीको पहुंचा, इस दौरान ग्रामीणों ने यहां बुला रखे सपेरों से सांप की तलाश शुरू करा दी। कुछ देर बार सपेरों ने सांप को ढूंढ लिया और सांप को पकड़ कर एक प्लास्टिक की बोतल में रख लिया। इसके बाद सांप को लेकर सपेरे गांव के श्मशान पर पहुंचे, यहां पिता-पुत्र की चिता के पास सांप को रख दिया। यहां मृत पिता-पुत्र को जिंदा करने के लिए झाड़ फूंक का ड्रामा शुरू कर दिया गया। इस दौरान गांव में वनकर्मियों ने पकड़े गए सांप को ग्रामीणों से लेने का प्रयास करने लगे। इसे लेकर ग्रामीण भडक़ गए और वनकर्मियों से अभद्रता करना शुरू दिया। ग्रामीणों के बढ़ते विरोध को देख वनकर्मी ईधर-ऊधर हो गए।
इस दौरान मृत पिता-पुत्र को फिर से जीवित करने के लिए सैपऊ क्षेत्र के एक गांव से तीन वायगिरों को मौके पर बुला लिया। इसके बाद ग्रामीणों ने सांप को बोलत से निकाल कर मार दिया और उसे चिता के पास ले गए।

सदर थाने के दो पुलिसकर्मी सादा पोशाक में गांव में पहुंचे और ग्रामीणों को समझाइश करने लगे, लेकिन मृतक के परिजन व ग्रामीण मृतकों के जिंदा होने के अंध विश्वास अड़े रहे। पुलिस की समझाइश के बाद भी मृतक परिजन के अडिय़ल रवैये के बाद शाम करीब साढ़े चार बजे अतिरिक्त पुलिस जाप्ता मौके पर बुलाकर मृत पिता-पुत्रों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल में शवगृह में पहुंचाया।

झाड़-फूंक के चक्कर से हुई मौत

गांव दरियापुर में पिता-पुत्र की मौत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को अस्पताल के शव गृह में पहुंचा दिया। लेकिन मृतक के परिजन दोनों को मृत नहीं समझ रहे है और उनका कहना है कि मृतकों के शरीर से पसीना आ रहा है इसलिए दोनों शवों को झाड़ फूंक करने के लिए किसी देवता के स्थान पर ले गए। जबकि दोनों की मौत बहुत पहले ही हो चुकी थी। मृतक सडक़ किनारे कच्चे मकान में रहकर अपने परिवार का ठेला चलाकर गुजर बसर करता था। घर के आसपास चारों तरफ पेड़-पौधे और झांडियां से घिरा हुआ है।

लापरवाही बनी मौत का बड़ा कारण
सांप की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। रात ज्यादा हो गई थी और इनका मकान जंगल में बना हुआ है.। वनकर्मियों का कहना है कि सांप के काटने के बाद लापरवाही बरती गई, जिसके चलते दोनों की मौत हो गई।

आसपास के ग्रामीणों का तांता
गांव दरियापुर में पिता-पुत्र के संाप के डंसने की सूचना मिलने पर आसपास के ग्रामीणों का में तांता लगा रहा। दोपहर तक बड़ी संख्या में आसपास के लोगा एकत्र हो गए और अंध विश्वास के ड्रामे को देखते रहे।

समय पर इलाज से बच सकती थी जान

चिकित्सकों का मानना है कि जिले में जहरीले कीड़े और सांप के काटने की वजह से ज्यादातर मामलों में मौत हो जाती है, जिसका कारण है मरीज को काफी देरी से जिला अस्पताल लेकर आना। अस्पताल लाने की जगह लोग झाड़ फूंक और टोटके के लिये मरीजों को ले जाते हैं। जिसकी वजह से जहर फैलने से ज्यादातर लोगों की मौत हो जाती है। इसलिए जिले में सांपों के द्वारा काटे जाने की वजह से मौत का आंकड़ा अधिक है। अगर मरीज शुरुआती दौर में ही झाड़ फूंक करवाने की जगह अस्पताल पहुंच जाए तो ज्यादातर लोगों को बचाया जा सकता है।

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