कागजों में दौड़ रहा कोरोना के विरुद्ध युद्ध

प्रशासनिक लापरवाही से अनियंत्रित हो सकते है हालात

राजाखेड़ा उपखंड में प्रशासनिक अनदेखी से कोरोना के विरुद्ध युद्ध सिर्फ कागजों में ही लड़ा जा रहा है, जहां अधिकारी सिर्फ आदेश निकाल कर ही अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। जमीन पर लागू कराने वाला क्षेत्र में कोई नही दिखता। कोरोना से लड़ाई का दायित्व सिर्फ पढ़े लिखे वर्ग तक ही सीमित होता जा रहा है। कोरोना का संक्रमण फैलता नजर आ रहा है।

By: Dilip

Updated: 18 Sep 2020, 11:32 PM IST

प्रशासनिक लापरवाही से अनियंत्रित हो सकते है हालात

राजाखेड़ा. राजाखेड़ा उपखंड में प्रशासनिक अनदेखी से कोरोना के विरुद्ध युद्ध सिर्फ कागजों में ही लड़ा जा रहा है, जहां अधिकारी सिर्फ आदेश निकाल कर ही अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। जमीन पर लागू कराने वाला क्षेत्र में कोई नही दिखता। कोरोना से लड़ाई का दायित्व सिर्फ पढ़े लिखे वर्ग तक ही सीमित होता जा रहा है। कोरोना का संक्रमण फैलता नजर आ रहा है।

उपखण्डाधिकारी के आदेश बेअसर

15 सितंबर को पत्रिका में खतरे में चलती रोडवेज सेवाओं पर खबर प्रकाशित होने के बाद रोडवेज प्रबंधन को आदेश जारी किया कि बस अड्डे पर टीम गठित कर थर्मल स्कैनिंग के साथ सेनिटीजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग की पालना के निर्देश दिए। रोडवेज जिला प्रबंधन ने एक परिचालक को ही जिसको बुकिंग की जिम्मेवारी दी गई है। उसी को यह सारे काम करने के लिए पाबंद कर दिया। ऐसे में अगर परिचालक बुकिंग, टेम्परेचर चेक कौन करेगा और बसों का सेनिटीजेशन कैसे होगा। शुक्रवार को बुकिंग विंडो पर भारी भीड़ थी, जहां सोशल डिस्टेंसिंग की पालना तो दूर यात्री टिकिट की जल्दी में धक्का-मुक्की करते नजर आए। उत्तरप्रदेश के लिए संचालित होने वाले इस संवेदनशील मार्ग पर लोग संक्रमित होने से कैसे बच सकते है। इसको देखने वाला कोई नही है ।

15 दिन से स्कूलों का संचालन
सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी क्षेत्र में पिछले 15 दिन से निजी स्कूले चोरी छिपे खोल दी गई हैं। जहां नियमों का पालन न होने से सैकड़ों छात्र छात्राओं का जीवन खतरे में डाला जा रहा है। गली गली में ट्यूशन सेंटर्स पर भी छात्रों की भीड़ दिखाई देती है अभिभावक संघ की प्रतिभा, उषा, ममता, विनोदिनी आदि माताओं के आरोप है कि फीस वसूली के लिए विद्यालय संचालक बच्चों को विद्यालय पहुंचने के लिए दबाव बना रहे है। जबकि बालकों की सुरक्षा के लिए उनके पास किसी तरह की कोई सुविधा नहीं है।

चिकित्सा विभाग बेदम

ब्लॉक मुख्य चिकित्साधिकारी का पद रिक्त पड़ा हुआ है। विभाग में समन्वय नहीं है। चिकित्सक व कर्मचारी खुद अपनी सुरक्षा के लिए डरे हुए है। पूर्व बीसीएमओ डॉ. महेश वर्मा के कोरोना से मौत के बाद कर्मचारी सदमे में है और भयभीत भी। कर्मचारियों ने बताया कि यहां लोग मास्क लगा कर नहीं आते। संवेदनशील हिस्से लेबोरेट्री में ही कर्मचारियों की हाथ और औजार धोने की सिंक गन्दी है उसमं े पानी तक नहीं है।

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