सुध ली होती इनकी तो अब नहीं होते मोहताज

परम्परागत जलस्रातों की अनदेखी के चलते अब लोग पेयजल के लिए दूरदराज भटनके को हो रहे हैं मजबूर

By: dinesh sharma

Published: 10 Apr 2019, 08:58 PM IST

मदनगंज-किशनगढ़(अजमेर).

कभी लोगों की प्यास बुझाने में अहम भूमिका अदा करने वाले परम्परागत जलस्रोतों पर अनदेखी की एेसी मार पड़ी कि अब लोग बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज हो गए हैं। उन्हें दैनिक जरूरत का पानी जुटाने के लिए भी दूरदराज भटकना पड़ रहा है। नगर के कई जलस्रोत वर्तमान में उपेक्षित पड़े हैं।

यदि इन जल स्त्रोतों के विकास की ओर से ध्यान दिया जाए तो यह न केवल स्वच्छ जल के स्त्रोत बन सकते हैं बल्कि इससे बीसलपुर से होने वाली आपूर्ति पर भी निर्भरता घटाई जा सकती है। साथ ही इससे भूमिगत जल स्तर बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। इससे नगरीय आबादी को पेयजल संकट से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सकती है।

वर्तमान में नगरीय क्षेत्र में पेयजल की समस्या बनी हुई है। गर्मियों में पानी की समस्या और बढ़ जाती है। वहीं नगरीय क्षेत्र और आसपास की आबादी पेयजल के लिए केवल बीसलपुर बांध पर ही निर्भर है। बीसलपुर से आपूर्ति गड़बड़ाने पर पानी की आपूर्ति भी प्रभावित होती है। वहीं पानी की आपूर्ति का कोई और विकल्प भी नहीं है।


नगर के जल स्त्रोत उपेक्षित

नगर के कई जल स्त्रोत सालों से उपेक्षित बने हुए है। इस कारण यह अतिक्रमण के शिकार हो गए हैं। उपेक्षित होने के कारण इन जल स्त्रोतों की आवक में कई जगह रूकावट पैदा हो गई है। साथ ही इनमें विलायती बबूल की भरमार भी हो गई है तथा कई जगह कचरा भी भरता जा रहा है।


बांध में लीकेज की हो मरम्मत

नगर के नया शहर के पास रियासतकालीन इकडंडिया बांध हैं। पहाडिय़ों के बीच बनाए गए इस बांध में बरसात का पानी एकत्रित होता है, लेकिन इसकी चादर में लीकेज होने के कारण पानी निकल जाता है। इस बांध की ऊंचाई करीब आठ फीट है। बरसात का पानी एकत्रित होने के बाद भी पानी लीकेज से बेकार बह जाता है। इस लीकेज की मरम्मत किए जाने की आवश्यकता है ताकि पानी का संग्रह किया जा सके।


बढ़ाई जा सकती है ऊंचाई

इस बांध के विकास की ओर ध्यान दिया जाए तो इसमें अधिक पानी एकत्र करने की क्षमता बढ़ाई जा सकती है। तीन ओर पहाडिय़ों से घिरे इस बांध की ऊंचाई बढ़ाने की काफी संभावनाए है। इसकी ऊंचाई दुगुनी से भी अधिक की जा सकती है। इसके साथ ही इस बांध में सफाई करवा कर विलायती बबूल आदि हटाए जा सकते हैं। इससे बांध की जल संग्रहण क्षमता में बढ़ोत्तरी होगी और साथ ही पानी की गुणवत्ता भी बढ़ जाएगी।


बावड़ी को मरम्मत की जरूरत

नगर के गौरव पथ पर सुभाष उद्यान स्थित है। यहां भी रियासतकालीन बावड़ी बनी हुई है। इस बावड़ी में पानी भी है। बावड़ी के ऊपर लोहे का जाल भी लगा हुआ है लेकिन इससे पत्थर निकल रहे हैं। कई जगह से दीवार जर्जर हो रही है। इस बावड़ी की जल्द मरम्मत कराए जाने की आवश्यकता है।


इनका कहना है इकडंडिया बांध काफी पुराना है। इसके मरम्मत और विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे नगर में मौजूद पुराना जल स्त्रोत विकसित होगा।

-सुनील मेहता


इकडंडिया बांध की चादर की मरम्मत कर लीकेज रोका जाना चाहिए। इससे बांध की जल संग्रहण क्षमता बढ़ेगी। बांध के विकास की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए।

-सज्जन सिंह

 

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