राजस्थान की टेस्टिंग लेब है यह यूनिवर्सिटी, देखिए कैसे होता है यहां मजाक

राजस्थान की टेस्टिंग लेब है यह यूनिवर्सिटी, देखिए कैसे होता है यहां मजाक

raktim tiwari | Publish: May, 19 2019 07:42:00 AM (IST) Ajmer, Ajmer, Rajasthan, India

कुलपतियों ने घोषणाएं की, लेकिन उनकी विदाई के साथ योजनाएं कागजों में दफन हो गई हैं।

अजमेर. फिजूल की योजनाएं बनाना और उन्हें पूरा नहीं करने की कला सीखना है तो महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय चले आइए। यहां संघठक कॉलेज बनाने और विद्यार्थियों से जुड़ी योजनाओं की शुरुआत नहीं हो पाई है। यहां बागडोर संभाल चुके कुलपतियों ने घोषणाएं की, लेकिन उनकी विदाई के साथ योजनाएं कागजों में दफन हो गई हैं।

1 अगस्त 1987 को स्थापित महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय का कोई संघठक कॉलेज नहीं है। जबकि राज्य में राजस्थान विश्वविद्यालय, उदयपुर के एम.एल. सुखाडिय़ा और जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के संघठक कॉलेज हैं। कुछ नए खुले विश्वविद्यालयों को भी सरकार ने संघठक कॉलेज दिए हैं। विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी ने शहर के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज को संघठक कॉलेज बनाने का प्रस्ताव तत्कालीन भाजपा सरकार को भेजा था। कुछ हद तक इंजीनियरिंग कॉलेज और विश्वविद्यालय प्रशासन की अरुचि के कारण योजना फ्लॉप हो गई।

खुद भी नहीं बना सके कॉलेज

पूर्व कुलपति प्रो. भगीरथ सिंह ने विश्वविद्यालय के एक्ट और स्वायत्तशासी संस्था होने का हवाला देकर संघठक कॉलेज की योजना बनाई। इसमें ऑनर्स स्तर के रोजगारोन्मुखी कॉलेज चलाना तय हुआ। प्रो. सिंह का कार्यकाल खत्म हो गया पर कॉलेज नहीं बन सका। इसी तरह पूर्व कुलपति प्रो. विजय श्रीमाली ने विश्वविद्यालय का स्नातक कॉलेज बनाने की योजना तैयार कराई। दुर्भाग्य से उनका देहांत हो गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी कुलपतियों की योजना को कागजों में दफन कर दिया है।

कब देंगे स्टार्ट अप में सहयोग...
उद्यम लगाने के इच्छुक विद्यार्थी अथवा नौजवान को विश्वविद्यालय ने स्टार्ट अप योजना में सहयोग देने की योजना बनाई थी। इसके तहत उनके प्रोजेक्ट का विश्वविद्यालय टीम को संबंधित उद्यम का तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक परीक्षण करना है। दल की सहमति होने पर स्टार्ट अप के लिए नियमानुसार ऋण मुहैया कराया जाना है। दुर्भाग्य से इस योजना का भी अता-पता नहीं है।

सिर्फ घोषणा बन गई योजनाएं...

-90 अथवा 95 प्रतिशत अंकों वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की पढ़ाई का खर्च देना
-विश्वविद्यालय में एफएम रेडियो और टीवी स्टूडियो

-एज्यूसेट से ऑनलाइन टीचिंग और स्मार्ट क्लासरूम
-सभी विद्यार्थियों के डिजिटल लॉकर बनाना

-शहरवासियों-विद्यार्थियों के लिए लाइब्रेरी को 24 घंटे खुले रखना
-खेलों में राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने वाले विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा

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