scriptराजस्थान की महिलाएं भारत समेत 96 देशों में दूर कर रहीं अंधेरा, 75 हजार से अधिक घरों में लगाए सोलर सिस्टम | Women of Rajasthan are dispelling darkness in 96 countries including India, solar systems installed in more than 75 thousand houses | Patrika News
अजमेर

राजस्थान की महिलाएं भारत समेत 96 देशों में दूर कर रहीं अंधेरा, 75 हजार से अधिक घरों में लगाए सोलर सिस्टम

Rajasthan News : अजमेर जिले में तिलोनिया गांव के बेयरफुट कॉलेज ने ना केवल भारत बल्कि दुनिया के 96 देशों में पहचान बनाई है। देश समेत अफ्रीका महाद्वीप एवं अन्य देशों की ग्रामीण महिलाओं को यहां सोलर उपकरण बनाने एवं उनकी देखभाल का प्रशिक्षण देकर उन्हें सोलर इंजीनियर के तौर पर तैयार किया जा रहा है।

अजमेरJun 12, 2024 / 03:32 pm

Omprakash Dhaka

Barefoot College of Tilonia village in Ajmer

किशनगढ़. तिलोनिया गांव के बेयरफुट कॉलेज में सोलरउपकरणों का प्रशिक्षण देते ट्रेनर।

Ajmer News : तिलोनिया गांव के बेयरफुट कॉलेज ने (समाज कार्य अनुसन्धान केंद्र) ना केवल भारत बल्कि दुनिया के 96 देशों में पहचान बनाई है। देश समेत अफ्रीका महाद्वीप एवं अन्य देशों की ग्रामीण महिलाओं को यहां सोलर उपकरण बनाने एवं उनकी देखभाल का प्रशिक्षण देकर उन्हें सोलर इंजीनियर के तौर पर तैयार किया जा रहा है। इस केंद्र में करीब 3 हजार महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने अपने गांव या क्षेत्रों के ऐसे घरों में सोलर उपकरण लगा कर उन्हें रोशन कर रही है जहां बिजली की व्यवस्था नहीं है या फिर केरोसिन इत्यादि से रोशनी की जाती रही है।
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किशनगढ़. तिलोनिया गांव के बेयरफुट कॉलेज में सोलर उपकरणों का प्रशिक्षण प्राप्त करती विदेशी महिलाएं।
समाज कार्य अनुसन्धान केंद ने वर्ष 1979 से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में कार्य करना प्रारंभ किया। राष्ट्रीय स्तर पर सर्वप्रथम लद्दाख जैसे सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों को सोलर ऊर्जा से रोशन किया। इस सफलता के बाद सन् 2005 में अफगानिस्तान से आए प्रशिक्षु दल के साथ ही विदेशी प्रशिक्षण की शुरुआत हुई। प्रशिक्षण के बाद यह पाया गया कि पुरुष गांवों में रुककर ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के बजाय शहरों की तरफ पलायन को अधिक महत्व दे रहे है। इसलिए प्रशिक्षण में महिलाओं और विशेषकर बुजुर्ग एवं अनपढ़ महिलाओं को प्राथमिकता दी गई, ताकि वे अपने गांव में रुककर अपने गांवों को रोशन कर सकें और सोलर सिस्टम की मरम्मत एवं रखरखाव से अपनी आजीविका भी कमा सकें।

ट्रेनिंग मॉडल को मिली मान्यता

वर्ष 2008 में भारत सरकार के आईटेक कार्यक्रम के तहत केंद्र के इस ट्रेनिंग मॉडल को मान्यता मिली। इसके तहत दुनिया के ऐसे गांवों का चयन किया गया जो कि बिजली की पहुंच से काफी दूर थे। उन गांवों का सर्वे करके कम पढ़ी लिखी या अनपढ़ ग्रामीण महिलाओं को सोलर प्रशिक्षण के माध्यम से बेयरफुट सोलर इंजीनियर बनाने के लिए तिलोनिया में 6 माह का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद ये महिलाएं बेयरफुट सोलर इंजीनियर के रूप में अपने गांवों को रोशन करना शुरू किया। यह प्रशिक्षण एक मुहीम बनकर शुरू हुआ जो वर्तमान में दुनिया के 96 देशों में तक पहुंच चुका है। 700 विदेशी महिलाओं सहित 3 हजार से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। यह बेयरफुट सोलर इंजीनियर महिलाएं 75 हजार से अधिक घरों को सौर ऊर्जा से रोशन करने का कार्य कर चुकी हैं।

वर्तमान में 22 महिलाओं का दल

वर्तमान में महिलाएं युवा और दिव्यांग विभाग गवर्नमेंट ऑफ साउथ अफ्रीका और फिक्की के सहयोग से साउथ अफ्रीका से 22 महिलाओं का एक दल सौर ऊर्जा का प्रशिक्षण लेने के लिए यहां आया हुआ है। इनका प्रशिक्षण जुलाई माह के अंत में पूर्ण होगा। ये महिलाएं सोलर के साथ-साथ संस्था की ओर से संचालित अन्य गतिविधियों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग, वाटर टेस्टिंग और वेस्ट मैनेजमेंट का कार्य भी सीख रही है। यहां प्रशिक्षण में सोलर लालटेन सर्किट बनाना, असेंबल करना, चार्ज कंट्रोलर सर्किट बनाना, होम लाइट सिस्टम बनाना और वायरिंग करना, टेस्टिंग करना, मरम्मत एवं मेंटीनेंस करना सिखाया जाता है।

समाप्त हुई केरोसिन पर निर्भरता

इससे केरोसिन पर निर्भरता समाप्त हुई और पर्यावरण को भी प्रदूषित होने से बचाया जा सका। वर्तमान में ये दुनियां भर में सोलर मम्मा रूप में भी जानी जाती है। भारत समेत इथोपिया, मलावी, यूगांडा, जिम्बाब्वे, केन्या, नामीबिया, जांबिया, तंजानिया, सेनेगल, माली, पीएनजी, जंजीबार, सूडान मेडागास्कर सहित 96 देशों में सोलर इंजीनियर बन अपनी आजीविका चला रही हैं।

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