
सांकेतिक तस्वीर फोटो जेनरेट AI
भारत में हर साल लाखों बच्चे जन्म से दिल की गंभीर बीमारी लेकर पैदा होते हैं। लेकिन उनके इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बेहद कम है। एक अंतरराष्ट्रीय शोध में खुलासा हुआ है कि देश में जरूरत के मुकाबले बच्चों की हार्ट सर्जरी बहुत कम हो पा रही है। इस बीच अलीगढ़ का जेएन मेडिकल कॉलेज उत्तर प्रदेश में बच्चों के जन्मजात हृदय रोग के इलाज का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। जहां हर साल हजारों बच्चों का सफल ऑपरेशन किया जा रहा है।
भारत में बच्चों की जन्मजात दिल की बीमारी को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। भारतीय थोरैसिक एंड कार्डियोवैस्कुलर सर्जरी जर्नल में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार देश में हर साल करीब 1.5 लाख बच्चों को जन्मजात हृदय रोग की सर्जरी की जरूरत पड़ती है। लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण बड़ी संख्या में बच्चों का समय पर इलाज नहीं हो पा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक पूरे देश में केवल करीब 120 विशेषज्ञ सर्जन उपलब्ध हैं। जबकि इनमें से लगभग 80 डॉक्टर ही पूरी तरह बच्चों की हार्ट सर्जरी में सक्रिय हैं। मौजूदा समय में देशभर में सालाना केवल 28 हजार ऑपरेशन ही हो पा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत को पूरा करने के लिए कम से कम 500 प्रशिक्षित सर्जनों की आवश्यकता है।
इस अध्ययन में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित जेएन मेडिकल कॉलेज को बच्चों की जन्मजात हृदय रोग सर्जरी के प्रमुख सरकारी केंद्र के रूप में शामिल किया गया है। शोध में कहा गया है कि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के मरीजों को इलाज के लिए बड़े महानगरों पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन अलीगढ़ का यह संस्थान अब प्रदेश के हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत बन रहा है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत यहां हर साल एक हजार से ज्यादा बच्चों की हार्ट सर्जरी की जा रही है। साल 2012 में जहां इस सेंटर पर केवल करीब 60 ऑपरेशन होते थे। वहीं अब प्रदेश के लगभग सभी जिलों से मरीज यहां पहुंच रहे हैं। यहां तक कि दिल्ली एम्स से भी उत्तर प्रदेश के बच्चों को इलाज के लिए अलीगढ़ रेफर किया जा रहा है।
विभागाध्यक्ष डॉ. आजम हसीन ने कहा कि देश में बच्चों के हार्ट सर्जन और विशेष सर्जरी केंद्रों की भारी कमी है। लगभग सभी राज्यों में मरीजों की लंबी प्रतीक्षा सूची बनी हुई है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रशिक्षण सीटें और इलाज की सुविधाएं नहीं बढ़ाई गईं। तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है। अध्ययन में सरकार और निजी संस्थानों के सहयोग से नए प्रशिक्षण केंद्र खोलने और छोटे शहरों तक सुविधाएं पहुंचाने की सिफारिश की गई है।
Updated on:
24 May 2026 10:54 am
Published on:
24 May 2026 10:52 am
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