Barawafat पर AMU में हजरत अली के हाथ के लिखे पवित्र कुरान के नुस्खे प्रदर्शित

AMU में कूफी लिपि में हजरत अली के हाथ के लिखे पवित्र कुरान के नुस्खे तथा मुगल सम्राटों द्वारा युद्ध में प्रयोग किये जाने वाले कुर्ते पर लिखित पूर्ण पवित्र कुरान को भी प्रदर्शनी का भाग बनाया गया।

अलीगढ़। अयोध्या में राम मंदिर पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के दूसरे दिन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जश्न-ए-ईद मीलाद उन नबी का श्रद्धापूर्वक आयोजन किया गया। अमुवि कैनेडी हाल में आयोजित सीरत उन नबी के जलसे की अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने की। इससे पूर्व कुलपति प्रोफेसर मंसूर ने मौलाना आजाद लाइब्रेरी के केन्द्रीय हॉल में हजरत मोहम्मद साहब की सीरत से सम्बन्धित उर्दू, हिन्दी, अंग्रेजी फारसी तथा अरबी की 500 से अधिक पुस्तकों एवं पत्रिकाओं, नातिया कलाम के ग्रंथों तथा पाण्डुलिपियों की प्रदर्शनी किया गया। कैनेडी ऑडीटोरियम के बाहर लॉन में इस्लामी कैलीग्राफी की कला कृतियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। कूफी लिपि में हजरत अली के हाथ के लिखे पवित्र कुरान के नुस्खे तथा मुगल सम्राटों द्वारा युद्ध मेप्रयोग किये जाने वाले कुर्ते पर लिखित पूर्ण पवित्र कुरान को भी प्रदर्शनी का भाग बनाया गया।

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हजरत मोहम्मद साहब की सबसे बड़ी खूबी दया

कैनेडी हाल में आयोजित मीलाद उन नबी के जलसे को सम्बोधित करते हुए अमुवि के इस्लामिक स्टडीज विभाग के पूर्व अध्यापक प्रो. यासीन मजहर सिद्दीकी ने कहा कि दया हजरत मोहम्मद साहब की सबसे बड़ी खूबी है। वह समस्त मानवता के लिये दयावान थे। प्रो. सिद्दीकी ने हजरत मोहम्मद साहब की सीरत की विभिन्न घटनाओं की चर्चा करते हुए बताया कि उनके यहां किसी प्रकार का धार्मिक तथा नस्ली भेदभाव नहीं था। ताइफ की यात्रा के दौरान जब हजरत मोहम्मद साहब पर हमला किया गया तो उन्होंने हमला करने वालों को क्षमादान देते हुए कहा कि वह नादान हैं तथा वास्तविकता को नहीं जानते। उन्होंने कहा कि विरोधियों को समाप्त करने के बजाय उनका दिल जीतना हजरत मोहम्मद साहब की बड़ी विशेषता थी।

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ज्ञान और श्रद्धा जरूरी

अमुवि के धर्मशास्त्र संकाय के पूर्व अधिष्ठाता प्रो. सैयद फरमान हुसैन ने कहा कि हजरत मोहम्मद के व्यक्तित्व से उस समय तक लाभान्वित नहीं हुआ जा सकता जब तक हमारे अन्दर 4 बातें पैदा न हो जाए। सबसे पहले ज्ञान का होना तथा हजरत मोहम्मद के जीवन से पूर्ण परिचित होना आवश्यक है तभी हम उनकी सीरत को समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि इन सबके साथ श्रद्धा का होना अति आवश्यक है। उन्होंने बताया कि एक और महत्वपूर्ण बात उनके संदेशों तथा उनके पाठ पर अमल करना है जिसके बगैर केवल कहने से काम चलाना अर्थहीन होगा।

विजय के बाद समझौता

सुलेह हुदैबिया की घटना पर विस्तार से चर्चा करते हुए प्रो. हुसैन ने कहा कि विजयी होने के बावजूद हजरत मोहम्मद साहब ने जिन पर विजय प्राप्त की, उन्हीं की शर्तों के अनुसार समझौता किया, जिस पर पवित्र कुरान में अल्लाह ने इसे महान विजय घोषित किया है। इस समझौते में हजरत मोहम्मद साहब की लचक उनकी सीरत को दर्शाती है।

विरोधियों का दिल जीतें

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. तारिक मंसूर ने उपस्थितजनों को ईद मीलाद उन नबी की बधाई दी। उन्होंने कहा कि हजरत मोहम्मद साहब समस्त मानव जाति के उत्थान तथा उसके सुधार के लिये संसार में भेजे गये। उनकी जीवनयात्रा तथा उनके संदेश पूर्ण रूप से सुरक्षित हैं जिनसे हमको सबक प्राप्त कर उसे अपने लिये जीवन का नमूना बनाना चाहिये। उन्होंने कहा कि हजरत मोहम्मद साब ने केवल 23 वर्ष के अन्दर समस्त समाज को सुधार दिया जबकि उस समय संचार के माध्यम बहुत सीमित थे। उन्होंने कहा कि उनका जीवन हमारे लिये हर ऐतबार से एक नमूना है तथा हजरत मोहम्मद साहब के जीवन से हमें यह भी सबक मिलता है कि बहुलवादी समाज में हमें किस प्रकार रहना है। उन्होंने शांति तथा साम्प्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया तथा समस्त मानव जाति के उत्थान का पथ दिखाया। उन्होंने कहा कि हजरत मोहम्मद साहब का जीवन हमें बताता है कि विषम परिस्थितियों में भी हमें आशा का दामन नहीं छोड़ना चाहिये। समाज में सभी से सम्बन्ध बनाये रखना। अपने विरोधियों का भी दिल जीतना चाहिये।

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महिला अधिकारों की सुरक्षा पर बल

कुलपति प्रो. मंसूर ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि समाज वर्गों मंे बंटा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म में ज्ञान की प्राप्ति पर बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि निजी तथा सामान्य जीवन एक जैसा होना चाहिये। उन्होंने कहा कि हजरत मोहम्मद साहब का अंतिम भाषण मानव अधिकारों का चार्टर है जिसमें महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा पर बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसलाम के मानने वालों को अन्य लोगों के लिये अपने कर्मों तथा अपने चरित्र से एक अच्छी मिसाल पेश करनी चाहिये।

कुरान का पाठ

इससे पूर्व सहकुलपति प्रोफेसर अख्तर हसीब ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि हजरत मोहम्मद साहब ने अपने अंतिम भाषण ‘‘खुतबा-ए-हज्जतुल विदा’’ में पवित्र कुरान को मजबूती से पकड़ने का संदेश दिया। वर्तमान में इस बात की आवश्यकता है कि हम हजरत मोहम्मद साहब की सीरत को अपने लिये जीवन का श्रोत बनायें। अमुवि के कुलसचिव श्री अब्दुल हमीद आईपीएस ने उपस्थितजनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संसार के सबसे महान व्यक्ति की स्मृति में समारोह का आयोजन करना गौरव एवं सम्मान का विषय है। धर्मशास्त्र संकाय के अधिष्ठाता प्रो. मोहम्मद सलीम ने स्वागत भाषण प्रसतुत किया। उन्होंने कार्यक्रम का संचालन भी किया। कार्यक्रम का शुभारंभ कारी मोहम्मद आज़म के पवित्र कुरान के पाठ से हुआ। कुलपति प्रो. तारिक मंसूर तथा सहकुलपति प्रो. अख्तर हसीब ने अतिथिवक्ताओं को शालें पहना कर सम्मानित किया। विश्वविद्यालय तथा स्कूलों के छात्र व छात्राओं ने नातें प्रस्तुत की। समारोह का समापन प्रो. मोहम्मद यासीन मजहर सिद्दीकी की प्रार्थना पर हुआ। प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर यूनिवर्सिटी लाइब्रेरियन डा. मोहम्मद यूसुफ, कुरानिक अध्ययन केन्द्र के निदेशक प्रो. एआर किदवई, डीएसडब्लू प्रो. शम्सुल हक, अमुवि प्रोक्टर प्रो. अफीफउलाह खान के अतिरिक्त बड़ी संख्या में अमुवि के अध्यापक, शोधार्थी, छात्र तथा प्रतिष्ठित नागरिक उपस्थित थे।

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Bhanu Pratap
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