जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष ने पीएम मोदी को लेकर दिया बड़ा बयान, सवर्णों के 10 प्रतिशत आरक्षण को बताया शगूफा

जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष ने पीएम मोदी को लेकर दिया बड़ा बयान, सवर्णों के 10 प्रतिशत आरक्षण को बताया शगूफा
Balaji

suchita mishra | Publish: Jan, 11 2019 01:02:21 PM (IST) Aligarh, Aligarh, Uttar Pradesh, India

ये बातें जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष बालाजी ने एएमयू में कहीं। जानिए और क्या क्या कहा।

अलीगढ़। जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष बालाजी ने पीएम नरेंद्र मोदी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मोदी चौकीदार नहीं बल्कि अंबानी के सीईओ लगते हैं। उन्होंने देश की संपत्ति को अंबानी एवं अडानी के हाथों बेच दिया है। बुधवार को जेएनयू छात्र अध्यक्ष अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी आए थे। उसी दौरान उन्होंने ये बातें कहीं। इस बीच बालाजी ने सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण को भी शगूफा बताया।

उन्होंने कहा कि देश भर के 30 हजार से अधिक युवाओं के साथ 7 फरवरी को दिल्ली में यंग इंडिया अधिकार मार्च का आयोजन किया जा रहा है। एबीवीपी के अलावा इसमें कोई भी संगठन शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा कि पीएम ने दो करोड़ युवाओं को नौकरी देने के लिए कहा था, लेकिन उसे पूरा नहीं किया। अभी भी सरकारी विभागों में 24 लाख पद खाली हैं। वहीं बालाजी ने 22 जनवरी को नेशनल प्रोटेस्ट डे मनाने का आह्वान किया। जेएनयू के छात्र संघ के अध्यक्ष ने कहा कि छात्र विरोधी व जन विरोधी नीतियों के खिलाफ यंग इंडिया नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी का गठन किया गया है। हमारा नारा ‘जुमला नहीं जवाब दो, पांच साल का हिसाब दो’ है।

शगूफा है 10 प्रतिशत आरक्षण
जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष ने कहा कि सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण एक शगूफा है। चुनाव के चंद महीने पहले सवर्णों को रिझाने के लिए लाया गया है। आरक्षण देना है तो निजी क्षेत्र में दें। सरकार या तो रोजगार दे या 18 हजार रुपये बेरोजगारी भत्ता दे।

यंग इंडिया अधिकार मार्च में ये होंगी मांगें
यंग इंडिया अधिकार मार्च में एएमयू छात्र संघ की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। एएमयू वीमेंस कॉलेज स्टूडेंट यूनियन एवं रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने भी आंदोलन को हर तरह का समर्थन देने का ऐलान किया है। इस दौरान रिक्त सरकारी पदों को भरने, सरकारी नौकरी की संख्या में वृद्धि, भर्ती में पेपर लीक एवं भ्रष्टाचार से मुक्ति, बजट का कम से कम 10 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करने, शिक्षा क्षेत्र में फंड एवं सीटों की संख्या में कटौती बंद करने तथा फीस वृद्धि पर रोक लगाने, लिंगभेद की नीति खत्म करने, शिक्षा का भगवाकरण बंद करने तथा शैक्षणिक संस्थानों में अभिव्यक्ति की आजादी सुनिश्चित करना आदि मांगें की जाएंगी।

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned