इस्लाम विश्व का पहला मज़हब, जिसने औरतों के साथ किया ये काम...

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में ‘भारतीय संविधान एवं इस्लाम में महिलाओं के अधिकार’ विषय पर व्याख्यान

अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वलिद्यालय के विधि विभाग में वरिष्ठ शिक्षक प्रोफेसर शकील समदानी का कहना कि इस्लाम धर्म न सिर्फ औरतों को बल्कि जानवरों के अधिकरों का भी ख्याल रखता है। जानवर को तकलीफ देने की वही सज़ा है जो इन्सानों को तकलीफ देने की है। प्रोफेसर समदानी अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एएमयू के बेगम सुल्तान जहां हॉल में ‘भारतीय संविधान एवं इस्लाम में महिलाओं के अधिकार’ नामक विषय पर व्याख्यान दे रहे थे।
भारतीय संविधान ने दिए अधिकार
प्रो. समदानी ने कहा कि भारतीय संविधान में महिलाओं को वो सारे अधिकार दिए हैं जो इन्सान होने के नाते उन्हें प्राप्त होने चाहिए। भारतीय संविधान न सिर्फ महिलाओं को बराबरी का अधिकार देता है, बल्कि उन्हें तरक्की के अधिक अवसर भी देता है। यदि विश्व के पाँच उच्चतम संविधानों का जिक्र किया जाए तो भारत उसमें से एक है। आज़ादी के बाद हिन्दू कोड बिल द्वारा धार्मिक आधार पर जो कमियाँ महिलाओं के अधिकरों में थी, उन्हें भी दूर कर दिया गया है। आज महिलाएं अपनी उन्नति के साथ-साथ देश की तरक्की में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

औरतों को मर्दों के बराबर अधिकार दिए
इस्लाम में दिए गए अधिकारों का वर्णन करते हुए प्रोफेसर समदानी ने कहा कि इस्लाम विश्व का पहला मज़हब है, जिसने औरत को इन्सान समझा और मर्दों के बराबर अधिकार दिए। पैगम्बर मोहम्मद ने जब मक्का में अपना मिशन शुरू किया तो उस समय महिलाओं की दशा इतनी खराब थी कि लोग अपनी नवजात बच्चियों को जिन्दा दफन कर देते थे। हज़रत मोहम्मद के आने के बाद उनकी दशा में मूलभूत सुधार हुआ। उन्हें पहली बार सम्पत्ति में भी अधिकार दिए गए। शादी एवं निकाह में उनकी मर्जी को जरूरी करार दिया गया। मेहर को उनका अनिवार्य अधिकार घोषित किया गया।
औरतों को खुला का अधिकार
प्रो. समदानी ने आगे कहा यदि इस्लाम मर्दों को तलाक देने का हक देता है तो औरतों को भी ‘खुला’ का अधिकार देता है जिसके द्वारा औरतें मर्दों से तलाक ले सकती है। प्रो. समदानी ने कहा कि कानून न मर्दों के हक में होना चाहिए न औरतों के, बल्कि न्याय पर आधारित होना चाहिए।

महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें
बेगम सुल्तान जहाँ हॉल की प्रोवोस्ट प्रोफेसर असमा अली ने प्रो. समदानी का स्वागत करते हुए कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए, ताकि कोई उसका हनन न कर सके। हॉल के अन्दर इस प्रकार के प्रोग्राम बराबर होते रहते है और छात्राऐं बहुत उत्साह के साथ ऐसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेती रहती है। प्रोग्राम का संचालन जकिया खान ने किया। धन्यवाद प्रस्ताव फहमीना शकील ने किया। इस प्रोग्राम को सफल बनाने में एमन जफर, सीनियर हाउस मॉनीटर नोरिया रफी, जॉइन्ट सीनियर हॉल अम्बर तनवीर, सम्पादक हिबा अली, हरीम फातिमा आदि ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस अवसर पर हॉल की दो छात्राओ जोया शाहीन और आफरीन नाज़ ने महिलाओं पर केन्द्रित कविता पढ़ी। डॉ. तबस्सुम चौधरी और डॉ. फरहीन की उपस्थिति उल्लेखीय रही।

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धीरेंद्र यादव
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