बैलों की जगह ग्रामीणों ने रस्सियों से खींची बैलगाड़ी, तब कहीं गांव में हुई रोशनी

गांव में फैले 'अंधियारे' को दूर करने ग्रामीणों ने खुद बैलों की तरह रस्सियों से खींची बैलगाड़ी, कीचड़ भरे रास्ते से बमुश्किल गांव में लाए 'रोशनी'...

By: Shailendra Sharma

Updated: 09 Sep 2020, 04:27 PM IST

अलीराजपुर. आजादी के 73 साल के बाद भी हमारे देश में कई जगहें ऐसी हैं जहां आज भी मूलभूत सुविधाओं के बिना ही लोग अपना जीवन यापन कर रहे हैं। कई बार मूलभूत सुविधाओं को लेकर जिम्मेदारों के सामने आवाज उठा चुके हैं लेकिन हालात ज्यों के त्यों हैं और लोगों को खुद ही अपनी समस्याओं को दूर करने के लिए एकजुटता के साथ प्रयास करना पड़ता है। ऐसा ही एक मामला मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जिले के वागदी गांव में सामने आया है। जहां करीब दो महीने से डीपी खराब होने के कारण अंधेरे में डूबे गांव को रोशन करने के लिए ग्रामीणों को खुद बैलगाड़ी पर डीपी को रखकर बैलों की जगह खुद रस्सियों से खींचकर जोबट जनपद तक लाना पड़ा।

बैलों की जगह ग्रामीणों ने खींची बैलगाड़ी
जोबट जनपद पंचायत के वागदी गांव के माफीदार फलिया और पटेल फलिया में बीते दो महीनों से डीपी खराब थी। गांव तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं है और कीचड़ से भरे रास्ते से बारिश के मौसम में निकलना मुश्किल होता है और आवाजाही पूरी तरह से बंद रहता है। करीब दो महीने पहले जब डीपी खराब हुई तो गांव अंधेरे में डूब गया, चाहते हुए भी ग्रामीण कुछ नहीं कर सकते थे क्योंकि डीपी सुधरवाने के लिए गांव से जोबट जनपद तक डीपी को लाना पड़ता और रास्ता कीचड़ से भरा हुआ था जिससे बैलगाड़ी से भी निकलना मुश्किल था। अब जब बारिश का दौर कुछ रुका तो ग्रामीणों ने खुद डीपी को बैलगाड़ी पर रखा और रस्सियों के सहारे खुद ही बैलों की जगह उसे खींचते हुए जनपद तक लाए और फिर वहां से वापस उसी तरह गांव पहुंचे।

लंबे समय से कर रहे हैं सड़क की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने के कारण कई तरह की असुविधाएं होती हैं। बारिश के मौसम में तो गांव से निकलना नामुमकिन सा होता है कई बार जिम्मेदारों से सड़क के लिए गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है। ग्रामीण बताते हैं कि आजादी के बाद से ही वो सरकार से उम्मीद लगाए हुए हैं कि उनके गांव तक सड़क बने लेकिन उम्मीद अभी भी पूरी नहीं हुई है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की जनआशीर्वाद यात्रा में पुल की भी मांग की थी। जिसके बाद जिला प्रशासन ने प्रस्ताव बनाकर pwd को दिया लेकिन आज तक वहां से हरी झंडी नहीं मिली है।

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