बंद पड़ी खदानों से हो रहा रेत का अवैध खनन और परिवहन!

Alirajpur News : जिले में रेत की 42 खदानें, अभी तक किसी की भी नहीं हुई नीलामी, फिर भी धड़ल्ले से हो रहा खनन

आलीराजपुर. जिले में बंद पड़ी रेत खदानों से प्रतिबंध के बावजूद प्रतिदिन सैकड़ों डंपरों के माध्यम से अवैध रेत का खनन व परिवहन खुले आम जिला प्रशासन व खनिज विभाग की आंखों के सामने हो रहा है। इससे शासन को प्रतिदिन लाखों रुपए की राजस्व का नुकसान हो रहा है। खनिज विभाग के जिम्मेदार अफसर इस मामले में पूरी तरह से जानबूझ कर अनभिज्ञ बने हुए हैं। इसका नतीजा यह हो रहा है कि अवैध खनन में प्रतिदिन लाखों रुपए खनिज माफियाओं व रेत विक्रेता गैरकानूनी तरीके से कमा रहे हैं। खास बात यह है इस ओर सरकार भी आंखे मंूद कर बैठी हुई है। जिला मुख्यालय से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में ओवरलोड रेत से भरे डंपर निकलते हुए देखे जा सकते है।
जानकारी के अनुसार जिले में 42 रेत खदानें है किंतु सभी खदानों की नीलामी अभी तक नहीं हुई है। इसके पहले 2014 में पांच साल की अवधि के लिए नीलामी हुई थी। पांच साल की अवधि समाप्त हो जाने के बाद से अभी तक नीलामी प्रक्रिया रुकी हुई है। ऐसी स्थिति में जब तक रेत खदानों की नीलामी नहीं हो जाती, तब तक रेत का खनन नहीं किया जा सकता है, किंतु जिले में बिना नीलामी के भी रेत खनन व परिवहन का नाम रेत भंडार के नाम पर धड़ल्ले से चल रहा है।
जिला मुख्यालय के समीप चांदपुर, साजनपुर, अकलू व आसपास के ग्राम अवैध रेत खनन व परिवहन के अड्डें बन चुके हैं। हालत यह है कि जिले में रेत खनन को लेकर अभी भी प्रतिबंध है। नई रेत खदानों की नीलामी की प्रक्रिया अभी तक नहीं हुई है। ऐसी स्थिती में मप्र की खदानों की रेत को अवैध ढंग से निकाला जा रहा है। इस कार्य में कई बड़े लोग संलिप्त हो चुके हैं। खनिज विभाग व रेत खनन माफियाओं की मिलीभगत से जिले से खुलेआम रेत खनन होने से जहां एक ओर शासन को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है। वहीं दूसरी ओर इस अवैध धंघे में लगे हुए कई रेत माफिया भी प्रतिदिन लाखों रुपए कमा रहे हैं। एक प्रसिद्ध उक्ति है कि राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट, अंत काल पछताएगा जब प्राण जाएंगे छूट। यह उक्ति आदिवासी बहुल आलीराजपुर जिले पर चरितार्थ हो रही है, क्यों कि इन दिनों यहां पर कुछ ऐसा ही चल रहा है।

बंद पड़ी खदानों से हो रहा रेत का अवैध खनन और परिवहन
राजेश मिश्रा
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