‘प्रेम, भाईचारा और विश्वास से विश्व में शांति होगी और भारत विश्व गुरु बनेगा’

‘प्रेम, भाईचारा और विश्वास से विश्व में शांति होगी और भारत विश्व गुरु बनेगा’

Arjun Richhariya | Publish: Sep, 11 2018 11:07:08 PM (IST) Alirajpur, Madhya Pradesh, India

पर्युषण पर्व के चलते जैन समाज में धार्मिक कार्यक्रमों का दौर जारी, मूलनायक भगवान आदिनाथजी और राजेंद्र सूरी की उतारी महाआरती

आलीराजपुर. भगवान महावीर के उपदेश आज भी अत्यंत प्रभावी और प्रासंगिक हैं। उन्होंने उपदेश दिया कि व्यक्ति को अपने जन्म से नहीं बल्कि कार्यों द्वारा जाना चाहिए। दुर्भाग्य से वर्तमान व्यवस्था अनुकूल नहीं है। भगवान महावीर ने सामाजिक अहिंसा के अनुपालन द्वारा मतभेदों और भिन्नताओं का समाधान करने की शिक्षा दी। भगवान महावीर का आदर्श वाक्य मित्ती में सव्व भूएसु अर्थात सब प्राणियों से मेरी मैत्री है। वर्तमान संदर्भ में इससे अधिक प्रासंगिक कुछ भी नहीं हो सकता। यह बात मंगलवार को राजेंद्र उपाश्रय में पयुर्षण के छठवें दिन साध्वी शासनलता श्रीजी ने कही। पर्युषण पर्व पर जैन समाज में धार्मिक कार्यक्रमों का दौर जारी है। भगवान महावीर के जन्म कल्याणक महोत्सव के दौरान महाआरती की बोली लगाने वाले लाभार्थी परिवार को श्रीसंघ द्वारा जैन मंदिर प्रांगण लाया गया। जहां भगवान मूलनायक आदिनाथजी और राजेंद्र सूरी की महाआरती उतारी गई। रात्रि में भक्तिमहोत्सव का आयोजन भी किया गया।

धर्म में दिखावा नहीं होना चाहिए
साध्वीजी ने कहा, धर्म किसी एक का नहीं है, जो इसे मानता है, यह उसी का है। धर्म में दिखावा बिलकुल नहीं होना चाहिए क्योंकि दिखावे में दु:ख होता है। महावीर स्वामी ने भी दुनिया को यही संदेश दिया था कि सिद्धांतों और विचारों पर चलकर ही शांति को पुनस्र्थापित किया जा सकता है। उन्होंने हमेशा आपसी एकता और प्रेम की राह पर चलकर जियो और जीने दो तथा अहिंसा के भाव को सर्वोपरि रखा। धर्म का बंटवारा नहीं होना चाहिए। वर्तमान समय में आपसी झगड़ों से संपूर्ण संसार ग्रसित है। चारों ओर हाहाकार मचा है। प्राणीमात्र सुख-शांति व आनंद के लिए तरस रहा है। ऐसे नाजुक क्षणों में सिर्फ महावीर स्वामी की अहिंसा ही विश्व शांति के लिए प्रासंगिक हो सकती है। भगवान महावीर की वाणी को यदि हम जन-जन की वाणी बना दें एवं हमारा चिंतन व चेतना जाग्रत कर प्रेम, भाईचारा, विश्वास अर्जित कर सके तो संपूर्ण विश्व में शांति स्थापित कर हम पुन: विश्व गुरु का स्थान प्राप्त कर सकते हैं।

महावीर बने बच्चे के लिए लगी बोली
प्रवचन के दौरान भगवान महावीर के बाल्यकाल का वर्णन साध्वीजी द्वारा सुनाया गया। इस दौरान वर्धमान महावीर की शिक्षा के लिए जाने के प्रसंग को लेकर बच्चों को भगवान महावीर बनाने की बोली लगाई गई, जिसका लाभ रमेशचंद्र रतीचंद जैन परिवार ने लिया। शाम को महावीर बने बच्चों द्वारा शिक्षा ग्रहण करने के प्रसंग का प्रस्तुतिकरण चल समारोह निकालकर किया गया। इस दौरान सभी बच्चों को स्टेशनरी किट श्री संघ द्वारा बांटे गए।

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