प्रदेश सरकार की नई रेत नीति के विरुद्ध 20 को करेंगे प्रदर्शन

प्रदेश सरकार की नई रेत नीति के विरुद्ध 20 को करेंगे प्रदर्शन
प्रदेश सरकार की नई रेत नीति के विरुद्ध 20 को करेंगे प्रदर्शन

Rajesh Mishra | Updated: 16 Sep 2019, 05:43:23 PM (IST) Alirajpur, Alirajpur, Madhya Pradesh, India

Alirajpur News : रेत बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले आलीराजपुर में विशाल प्रदर्शन होगा, मुख्यमंत्री कमलनाथ के नाम से कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा

आलीराजपुर. प्रदेश कांग्रेस सरकार ने जब से नई रेत उत्खनन नीति लागू करने का निर्णय लिया तब से आदिवासी बहुल आलीराजपुर जिले में आदिवासी रेत ठेकेदार एवं ग्रामीणों में हाहाकार मचा हुआ है। ये लोग इस नीति के विरोध में उतर पड़े हंै। जिला कांग्रेस कमेटी एवं रेत बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष महेश पटेल सहित सभी आदिवासी ठेकेदारों एवं ग्रामीणजन से इस नीति को आदिवासियों का गला घोंटने वाली नीति बताया है। इस रेत नीति के विरोध में आगामी 20 सितंबर को रेत बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले आलीराजपुर में विशाल प्रदर्शन होगा। इस दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ के नाम से कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।
रेत बचाओ समिति का किया गठन : रविवार को जिला मुख्यालय पर महेश पटेल की उपस्थिति में जिले के अनेक आदिवासी रेत ठेकेदार और इस व्यवसाय से जुड़े ग्रामीणजन एकत्र हुए और एक आपातकालीन बैठक की। इस बैठक में रेत बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया गया। इसमें संरक्षक भदू पचाया, अध्यक्ष महेश पटेल, उपाध्यक्ष गुमानसिंह हरवाल, गिलदारसिंह चौहान, कैलाश चौहान, कोषाध्यक्ष केरू पटेल, सचिव गोविंद परमार, सह सचिव बहादुरसिंह भिंडे एवं अन्य को सदस्य मनोनीत किया गया है।
आदिवासियों से आजीविका का माध्यम छिन जाएगा : समिति के अध्यक्ष महेश पटेल एवं पदाधिकारियों ने बताया, मप्र शासन द्वारा हाल ही में पूरे प्रदेश में नई नीति लागू की गई है। इस नई रेत नीति से इस आदिवासी बहुल जिले सहित पूरे प्रदेश को नुकसान होने का अंदेशा है। उल्लेखनीय है कि पूर्व की रेत नीति में अलग-अलग खदान के मान से खुली नीलामी होती थी। इसमें छोटे, मंझले आदिवासियों को रोजगार की उपलब्धता हो जाती थी, किंतु नई रेत नीति से ब्लॉक स्तरीय ऑनलाइन नीलामी का प्रावधान रखा गया है। इससे बाहरी, बड़े, रसूखदार व्यापारियों को व्यवसाय करने का मौका मिलेगा, किंतु इस जिले के गरीब आदिवासियों के रोजगार में कमी हो जाएगी। जिले के आदिवासियों की आजीविका के लिए रेत खनन एक प्रमुख साधन है जिससे उनके परिवार का भरण पोषण होता है। नई रेत नीति से इनके आजीविका का माध्यम छिन जाएगा।
रेत खनन नीति में होना चाहिए संशोधन : पटेल ने बताया, संविधान की पांचवीं अनुसूची एवं पैसा एक्ट के तहत जनजातीय इलाके में खनन कार्य को बिना आदिवासी बहुल ग्रामसभाओं की अनुमति से नहीं किया जा सकता है, लेकिन सरकार की वर्तमान खनन नीति आदिवासी इलाकों में बिना आदिवासियों के खनन किया जाएगा। साथ ही जो नीति बनाई गई है, उसमें कोई भी आदिवासी रेत खनन प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेगा क्योंकि ऑनलाइन टेंडर में करोड़ों रुपए का निवेश होगा। इसे वहन करने के लिए कोई भी गरीब आदिवासी सक्षम नहीं हंै। इस कारण नई रेत खनन नीति में संशोधन होना चाहिए ताकि आदिवासी बहुल जिले के आदिवासियों को रेत खनन का कार्य एवं रोजगार उपलब्ध हो सके। बैठक में समिति के पदाधिकारियों और आदिवासी ग्रामीणों ने बाहरी ठेकेदार भगाओ और जिले के आदिवासियों का जीवन बचाओ जैसे जमकर नारे लगाए। महेश पटेल ने बताया, आदिवासी जनजीवन विरोधी इस नई रेत नीति के विरोध में 20 सितंबर को जिला मुख्यालय पर हजारों की संख्या में आदिवासी ग्रामीण एकत्र होंगे और विशाल प्रदर्शन करेेंगे।

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