scriptA person standing on the basis of lies should not come to theHighCourt | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि झूठ की बुनियाद पर खड़े व्यक्ति को कोर्ट में नहीं आना चाहिए | Patrika News

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि झूठ की बुनियाद पर खड़े व्यक्ति को कोर्ट में नहीं आना चाहिए

कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करने वाले को बाहर का रास्ता देखना होगा। कोर्ट ने याची को 45 दिन में हर्जाना राशि महानिबंधक के समक्ष जमा करने का निर्देश दिया है और कहा है कि उसमें से 50हजार शिकायत कर्ता को दिया जाय।शेष 50हजार राजकीय बाल गृह शिशु खुल्दाबाद, प्रयागराज के बैंक खाते में जमा किया जाय।जो बाल कल्याण में खर्च किया जाय।

इलाहाबाद

Updated: April 20, 2022 12:38:40 pm

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सगाई के बाद दहेज की मांग पूरी न होने पर शादी से इंकार मामले में गलत बयानी के साथ दाखिल याचिका एक लाख रुपए के हर्जाने के साथ खारिज कर दी है। मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि झूठ की बुनियाद पर खड़े व्यक्ति को कोर्ट में नहीं आना चाहिए। स्वच्छ हृदय के साथ आने वाले को ही न्याय मिलेगा। कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करने वाले को बाहर का रास्ता देखना होगा। कोर्ट ने याची को 45 दिन में हर्जाना राशि महानिबंधक के समक्ष जमा करने का निर्देश दिया है और कहा है कि उसमें से 50हजार शिकायत कर्ता को दिया जाय।शेष 50हजार राजकीय बाल गृह शिशु खुल्दाबाद, प्रयागराज के बैंक खाते में जमा किया जाय।जो बाल कल्याण में खर्च किया जाय।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि झूठ की बुनियाद पर खड़े व्यक्ति को कोर्ट में नहीं आना चाहिए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि झूठ की बुनियाद पर खड़े व्यक्ति को कोर्ट में नहीं आना चाहिए
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यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने उमेश कुमार यादव व अन्य की धारा 482के तहत दाखिल याचिका पर दिया है।
याची पर आरोप है कि शिकायत कर्ता की बेटी से शादी तय हुई।एक लाख नकद लिया और 75 हजार गोदभराई व्यवस्था में खर्च हुए। बुकिंग में 50हजार एडवांस दिया गया।बाद में पांच लाख नकद, मोटरसाइकिल, सोने की जंजीर मांगी।मांग पूरी न होने पर शादी निरस्त कर दिया।जिसपर हंडिया थाने में एफ आई आर दर्ज कराई गई और आपराधिक केस कायम किया गया। धारा 200 व 202 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत बयान दर्ज किए गए।
दो लाख देने पर समझौते की बात चली।विवाद हल न होते देख हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आपराधिक केस रद्द करने की गुहार लगाई।कहा दोनों पक्षों में समझौता हो चुका है।जब कि यह सही नहीं है। कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना और एक लाख हर्जाना लगाया है।

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