अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने सीएम योगी की बैठक का किया बहिष्कार, इन मुद्दों को लेकर है नाराज

कहा अखाडा परिषद की मांगों की हो रही है अनदेखी, सरकार के वादों और बातो का कोई मतलब नही

By: प्रसून पांडे

Published: 12 Oct 2018, 10:30 PM IST

इलाहाबाद:संगम नगरी में मुख्यमंत्री राज्यपाल और उप राष्ट्रपति के आने से पहले अखाड़ा परिषद में आपातकालीन बैठक बुलाई। योगी सरकार के रवैए पर अखाड़ा परिषद के संतों ने अपनी गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि शनिवार को मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई मार्गदर्शक मंडल की बैठक का अखाड़ा परिषद बाईकाट करेगा। संत समाज उसमें शामिल नहीं हो रहा है।बता दें कि शनिवार को मुख्यमंत्री अपने दो दिवसीय दौरे पर संगम नगरी पहुंच रहे हैं। ऐसे में शुक्रवार की देर शाम अखाड़ा परिषद द्वारा बुलाई गई बैठक में निर्णय किया गया कि मुख्यमंत्री ने संतो के साथ जो मार्गदर्शक मंडल की बैठक बुलाई है । उसमें संत समाज शामिल नहीं होगा ।अखाड़ों की संतों की मानें तो संत समाज अगर एक संत मुख्यमंत्री के राज में भी सुविधाओं के लिए भटक रहा है। उसकी सुनवाई नहीं हो रही है तो ऐसे में संत सीएम के साथ क्यों खड़ा होगा।

अखाड़ा परिषद के महंत नरेंद्र गिरी का कहना है कि सरकारी अमला कुंभ के नाम पर पूरी तरह से मनमानी करने पर उतारू है ।संत महात्माओं की कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में गवर्नर और सीएम के साथ बैठक करने का कोई औचित्य ही नहीं है ।क्योंकि पिछली सरकारों में अखाड़ा परिषद की बातों को तवज्जो दिया जाता था। फैसलों और वादों पर अमल होता था।लेकिन इस सरकार ने संतों को दरकिनार कर रखा है।सारी बातें सिर्फ कागजों पर और भाषणों में दी जा रही हैं।वहीं अखाड़ा परिषद के अचानक बैठक बुलाने पर संत महात्माओं में भी हड़कंप मचा रहा ।लगभग दो घंटे तक बड़ा पंचायती अखाड़ा मुख्यालय में बैठक हुई जिसके बाद अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने कहा 2019 कुंभ कार्यों में धीमी गति को लेकर नाराजगी जताई।

कहा कि अखाड़ा परिषद् के विकास कार्यों के बजट में सरकार जीएसटी और अन्य टैक्स लगा कर भुगतान कर रही है। जिसकी वजह से अखाड़ा कार्यों में धीमी गति से काम हो रहे हैं। जब सरकार ने अखाड़ा विकास कार्यों के लिए एक करोड़ देना था। लेकिन टैक्स लगा देने से बजट में कुल 55 लाख भुगतान किए गए है। महंत नरेंद्र गिरी का कहना है कि जिस प्रकार उज्जैन कुंभ मेले में मध्यप्रदेश सरकार ने अखाड़ा कार्यो के लिए ढाई करोड़ बजट किये थे। उसी तरह उत्तर प्रदेश सरकार को करना चाहिए। सबसे बड़ी दुःख की बात यह है कि सरकार ने कर्यो के लिए जो भी भुगतान किये है उसमे भी टैक्स काट कर दिए हैं।अब तक 45 लाख काटकर 55 लाख अखाड़ा कार्यों के लिए गए है। हम लोगों की मांग है कि अगर सरकार टैक्स काट रही है तो बजट को और बढ़ाए या फिर बजट के पैसो को टैक्स काट कर दिया जायेगा। इसके साथ ही सरकार पेशवाई मार्गों के चौड़ीकरण के साथ ही सुंदरीकरण का कार्य हो।

प्रसून पांडे
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