सर्वाधिक प्रधानमंत्री देने वाला शहर बना आतंकवाद की नर्सरी, खुफिया तंत्र हुआ फेल

 सर्वाधिक प्रधानमंत्री देने वाला शहर बना आतंकवाद की नर्सरी, खुफिया तंत्र हुआ फेल
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इलाहाबाद का आतंकवादियों के कनेक्शन ने सबकी उड़ाई नींद

इलाहाबाद.  देश को सर्वाधिक प्रधानमंत्री देने वाला शहर इलाहाबाद आज आतंकियों की नर्सरी बनता नजर आ रहा है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के शहर से लगातार आतंकवादियों के कनेक्शन सामने आ रहे हैं लेकिन प्रदेश सरकार की सारी तैयारियां आतंकियों के आगे फेल साबित हो रही हैं। पुलिस और एंटी टेरिरिस्ट सहित अन्य एजेंसियों की नाक के नीचे आतंकी महीनों रहे लेकिन खुफिया एजेंसियों को भनक तक नहीं लगी। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों पर भी सवाल उठना तय है।

उत्तर प्रदेश का सर्वाधिक विधानसभा क्षेत्र वाला जिला इलाहाबाद वर्तमान में आतंकियों की फैक्ट्री बनता नजर आ रहा है। इलाहाबाद ने देश को सात ऐसे प्रधानमंत्री दिए जिनका संबंध चुनावी क्षेत्र निवास जन्म या शिक्षा से रहा है। वहीं वर्तमान में प्रदेश सरकार के डिप्टी सीएम भी इलाहाबाद के ही हैं। बावजूद इसके यह जिला आतंकियों का गढ़ बनता नजर आ रहा है। यहां के कुछ खास इलाकों में आतंकी बेखौफ अपनी सक्रिय हैं। लेकिन खुफिया एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लग पा रही है।


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स्थानीय पुलिस एलआई एंटी टेरिरिस्ट सहित अन्य एजेंसियों के सारे श्रोत आतंकियों के आगे बौने साबित हो रहे हैं। यही कारण है कि एक के बाद एक पकड़े जा रहे आतंकियों के कनेक्शन इलाहाबाद से निकल रहे हैं। आतंकी वली उल्ला के बाद सलीम का इलाहाबाद के करेली में ठिकाना मिला है। सलीम कई अपनी पत्नी के साथ काफी समय तक यहां रहा। यहीं से वह आतंकवादी संगठन लश्कर ए तैयबा के सम्पर्क में आया। अब सलीम करेली में रहते हुए कितने युवाओं को आतंक की राह में ढकेल दिया है। इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता। वहीं खुफियां एजेंसियों के भी कान उस समय खड़े होते हैं जब उन्हें इलाहाबाद के करेली गौस नगर या फूलपुर कनेक्शन का पता चलता है।  

पाकिस्तानी आईएसआई एजेंट दो साल तक इलाहाबाद से करता रहा फंडिंग
पिछले साल लखनऊ में पकड़ा गया आतंकी जमालउद्दीन दो साल तक इलाहाबाद रहा। यहीं से आईएसआई एजेंट को तीन बार फंडिंग किया लेकिन खुफिया एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। आतंकी जमालउद्दीन इलाहाबाद के मीरगंज शाखा स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर से जैसलमेर स्थित शाखा में अपने एजेंट के एकाउंट में एक बार 8 हजार और दो बार 10-10 हजार रूपये भेजे गए। वहीं जब मामले की जानकारी भारतीय खुफिया एजेंसियों को हुई तो उनके कान खड़े हो गए।

2001 में आया था पहला मामला

इलाहाबाद से आतंकवाद कनेक्शन का मामला पहली बाद 2001 मंे सामने आया था। जब फूलपुर में वजीउल्ला की गिरफ्तारी हुई थी। उसके द्वारा इलाहाबाद में आतंकवादियों को फंडिग करने का मामला सामने आया था। खुफिया एजेंसियों ने जब छानबीन की तो उसकी डायरी से पाकिस्तान अफगानिस्तान सहित कई अन्य खाड़ी देशों से उसके तार जुड़े मिले।



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अर्धकुंभ पर भी मड़राया था पत्रकार आतंकी का खतरा
संगम नगरी इलाहाबाद में 2006-07 में अर्धकुंभ पर आतंवाद का खतरा मडराया था। दरअसल उस दौरान आईबी को सूचना मिली थी कि एक आतंकवादी अलजजीरा का पत्रकार बन कर बड़ी वारदात को अंजाम देने वाला है। जांच एजेंसियां जांच में जुट गई हैं। जांच के दौरान अरैल स्थित एक टेंट में आतंकी के छिपे होने की सूचना मिली। जिसके बाद टेंट को चारो ओर से घेर लिया गया लेकिन पता चला वह भाग चुका है।

आतंकी चिट्टी की नहीं सुलझी गुत्थी
पिछले करीब डेढ़ साल से एक अज्ञात चिट्ठी मिल रही है। जिसमें लगातार रेलवे ट्रैक उड़ाने की धमकी दी जाती है। जब पहली बाद यह चिट्ठी मिली तो उसे आतंकी चिट्ठी मान कर पुलिस प्रशासन से लेकर खुफिया विभाग जांच में जुट गई। वहीं एक के बाद एक जब चिट्ठी मिली तो पुलिस प्रशासन की जांच भी ठंडी पड़ती नजर आई। 
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