तलवार दंपत्ति के वकील को फैसले की कापी मिली, शनिवार को डासना जेल रिहा हो सकते हैं राजेश और नुपुर

Prasoon Pandey

Publish: Oct, 13 2017 05:19:29 (IST) | Updated: Oct, 13 2017 05:24:29 (IST)

Allahabad, Uttar Pradesh, India
तलवार दंपत्ति के वकील को फैसले की कापी मिली, शनिवार को डासना जेल रिहा हो सकते हैं राजेश और नुपुर

सीबीआई की स्पेशल अदालत के फैसले के खिलाफ तलवार दंपत्ति की याचिका पर आया फैसला

इलाहाबाद. चर्चित आरूषि .हेमराज मर्डर मामले में गुरूवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद शुक्रवार को तलावार दंपत्ति के वकील को फैसले की कापी अदालत ने सौंप दी। अब इस आदेश की कापी गाजियाबाद की स्पेशल अदालत में दी जायेगी जिसके बाद काफी को डासना जेल भेजा जायेगा । डा. राजेश तलवार और उनकी पत्नी नुपुर तलवार के रिहाई शनिवार को तकरीबन तय मानी जा रही है। बतादें कि सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद के आदेश के खिलाफ डाक्टर दंपत्ति की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने तलवार दंपत्ति का गुरूवार को बरी कर दिया था। न्यायमूर्ति वीके नारायण और न्यायमूर्ति ए के मिश्रा प्रथम की खण्डपीठ ने कहा था कि सीबीआई ने जो साक्ष्य दिया उससे यह साबित नहीं हो सका कि तलवार दंपत्ति ने आरूषि और हेमराज की हत्या की है। कोर्ट ने कहा कि साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ अपीलार्थी तलवार दम्पति को दिया जाना चाहिए। इस नाते साक्ष्य के अभाव में उन्हें आरोपों से बरी कर दिया है। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने दंत चिकित्सकों को बरी कर दिया था। जिसकी कापी शुक्रावार को अदालत ने तलवार दंपत्ति को सौंप दी। जिसके आधार पर डासना जेल से दोनों की रिहाई शनिवार को की जायेगी।

क्या है पूरा मामला

16 मई 2008 को दिल्ली से सटे नोएडा के जलवायु विहार स्थित घर में 14 साल की आरुषि का शव मिलाए जबकि 17 मई को नौकर हेमराज 45 की डेड बाडी छत पर मिली थी। आरूषि का गला रेता गया था। 2008 के आरुषि.हेमराज हत्याकांड में अदालत आरुषि के माता.पिताए नूपुर और राजेश तलवार को दोषी मान करार दिया। उस वक्त की उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। नूपुर और राजेश तलवार गाजियाबाद की डासना जेल में अपनी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।

पहले फैसला सुरक्षित रखा था हाईकोर्ट ने

सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने 6 नवम्बर 2013 को नूपुर और राजेश तलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दंपति ने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस बीके नारायण और जस्टिस एके मिश्रा ने इस साल 7 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई 18 महीने तक चली थी।तलवार दंपति दिल्ली.एनसीआर के जाने माने डेंटिस्ट रहे। डाण्राजेश पंजाबी परिवार से हैं और नुपुर महाराष्ट्रियन फैमिली से हैं। नुपुर एयरफोर्स के अफसर की बेटी हैं और डाण् राजेश हार्ट स्पेशलिस्ट के बेटे हैं। आरुषि का जन्म 1994 में हुआ था।सीबीआई की दो टीम ने जांच की एक ने क्लीन चिट दीए दूसरी ने तलवार दंपति को सस्पेक्ट माना। इस मामले की जांच सबसे पहले यूपी पुलिस ने शुरू की थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने तलवार दंपति को शक के घेरे में लिया था। बाद में यह जांच सीबीआई को सौंपी गई। इस केस की जांच 31 मई 2008 को उस वक्त के सीबीआई ज्वाइंट डायरेक्टर के हाथ में आई। उन्होंने तलवार दंपति को क्लीन चिट दी और तीन नौकरों को सस्पेक्ट माना। इसके बाद सितंबर 2009 में फिर से सीबीआई की दूसरी टीम ने जांच शुरू की। इस बार सीबीआई के अफसर एजीएल कौर ने जांच शुरू की। उन्होंने तलवार दंपति को प्राइम सस्पेक्ट माना।

16 मई 2008 को मिली थी आरूषि हेमराज की डेड-बाडी

16 मई 2008 आरुषि तलवार की बाडी उनके घर में मिली और 17 मई को नेपाल के रहने वाले नौकर हेमराज की लाश छत पर मिलीए उसी पर आरुषि की हत्या का आरोप राजेश तलवार ने लगाया था। 18 मई 2008 को जांच में यूपी एसटीएफ को भी लगाया गया। पुलिस ने कहा कि दोनों मर्डर बेहद सफाई से किए गए। साथ ही पुलिस ने माना की मर्डर में परिवार से जुड़े किसी शख्स का हाथ है और 19 मई को तलवार परिवार के पूर्व घरेलू नौकर विष्णु शर्मा पर भी पुलिस ने शक जाहिर किया। 21 मई को यूपी पुलिस के साथ ही दिल्ली पुलिस भी मर्डर की जांच में शामिल हुई और 22 मई को आरुषि की हत्या आनर किलिंग होने का शक पुलिस ने जाहिर किया। इस पहलू से भी जांच शुरु की गई। पुलिस ने आरुषि के लगातार संपर्क में रहे एक नजदीकी दोस्त से भी पूछताछ की। इस दोस्त से आरुषि ने 45 दिनों में 688 बार फोन पर बात की थी।

23 मई को डा राजेश तलवार को मर्डर अरेस्ट किया

23 मई 2008 को पुलिस ने डॉ राजेश तलवार को मर्डर के आरोप में अरेस्ट किया और 29 मई को जांच सीबीआई के हवाले हुई। एक जूनए 2008 को सीबीआई ने जांच शुरू की। तीन जूनए 2008 को कम्पाउंडर कृष्णा को पूछताछ के लिए सीबीआई ने हिरासत में लिया। 27 जूनए 2008 को नौकर राजकुमार को अरेस्ट किया गया। 12 जुलाईए 2008 को नौकर विजय मंडल अरेस्ट डाण् तलवार को जमानत मिली। 29 दिसंबर 2010 सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट लगाई। गाजियाबाद कोर्ट ने नौकरों को क्लीन चिट दी लेकिन पेरेंट्स के रोल पर सवाल उठाए। 09 फरवरी 2011 को मामले में तलवार दंपति बने आरोपी। 21 फरवरी 2011 को दंपति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से अपील की। हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट इनके खिलाफ सुनवाई शुरू करने के आदेश दिए। 19 मार्च 2011 को सुप्रीम कोर्ट गएए यहां भी राहत नहीं मिली। 11 जूनए 2012 को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। इस मामले की सुनवाई जस्टिस एस लाल ने की और 26 नवम्बर 2013 को नूपुर और राजेश तलवार को उम्रकैद की सजा हुई। जस्टिस एस लाल ने 208 पेज का जजमेंट सुनाया था। जिसके खिलाफ तलवार दंपत्ति ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। जिस पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने इन्हे बरी कर दिया है।

 

 

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