उर्दू अनुवादकों की बर्खास्तगी रद करने पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

आबकारी विभाग में काम कर रहे उर्दू अनुवादकों की बर्खास्तगी रद करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी।

इलाहाबाद. हाईकोर्ट इलाहाबाद ने आबकारी विभाग में कार्यरत 11 उर्दू अनुवादकों-लिपिकों को बर्खास्त करने के एकलपीठ के फैसले में रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है और एकलपीठ के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की विशेष अपील को सुनवाई के लिए 21 सितम्बर को पेश करने का आदेश दिया है।

 

यह आदेश न्यायमूर्ति अरूण टंडन तथा न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की खण्डपीठ ने दिया है। कोर्ट ने शौकत अली व अन्य उर्दू अनुवादकों की नियुक्ति नियमावली पर सवाल खड़ा करते हुए प्रमुख सचिव से पूछा है कि बिना नियमावली का गजट किये उसे लागू कैसे किया जा सकता है।

 

कोर्ट ने यह भी पूछा है कि जब नियुक्तियां जिला, मण्डल व राज्य स्तरीय कार्यालयों में की गयी है तो एक पद पर मण्डलायुक्त ने किस प्रकार आरक्षण निर्धारित किया है साथ ही क्या 1994 की नियमावली का पालन करते हुए नियुक्तियां की गयी है। अनुच्छेद 309 के तहत नियमों को बजट किये बगैर लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इन मुद्दों पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। सरकार ने 11 उर्दू अनुवादकों को बर्खास्त कर दिया था जिसे एकलपीठ ने रद्द कर दिया। इसी आदेश को अपील में चुनौती दी गयी है।

 

नोएडा के किसानों के मुआवजा मामले पर डीएम व सीईओ से मांगा हलफनामा
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गौतमबुद्ध नगर के छलेरा गांव के किसानों की धारा 28 ए के तहत बढ़ा हुआ मुआवजा देने के मामले में जिलाधिकारी व नोएडा के सीईओ से बेहतर हलफनामा मांगा है और याचिका की अगली सुनवाई 21 सितम्बर की तिथि तय की है।


यह आदेश न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता तथा न्यायमूर्ति डी.के.सिंह की खण्डपीठ ने सत्यपाल सिंह व 21 अन्य की याचिका पर दिया है। मालूम हो कि 93 किसानों ने अर्जी दाखिल की जिसमें से कुछ निर्णीत हो पायी और काफी विचाराधीन है। नोएडा ने किसानों को मुआवजा देने के लिए बिना निर्धारण किए राज्यसरकार से 42.5 करोड़ रूपये प्राप्त कर जमा कर लिए। 63 अर्जियों पर अभी निर्णय नहीं लिया है। 18 दिसम्बर 2015 को अवार्ड हुआ है जिसमें मुआवजा बढ़ाने की अर्जियां दाखिल की गयी है। डीएम व सीईओ ने हलफनामा दाखिल किया। कोर्ट ने बेहतर हलफनामा मांगा है।

by  PRASOON PANDEY

 

 

रफतउद्दीन फरीद
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