मृतक आश्रित विधवा को नौकरी में आयु की छूट गलत नहीं: हाईकोर्ट

मृतक आश्रित विधवा को नौकरी में आयु की छूट गलत नहीं: हाईकोर्ट
Allahabad High Court

योगी ने कहा-  विधवा के लिए आयु 40 वर्ष एवं अन्य के लिए 37 वर्ष रखने की नीति गलत नहीं

इलाहाबाद. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि मृतक आश्रित कोटे में विधवा को नौकरी में आयु के लिए छूट अन्य से हटकर देना गलत नहीं है। हाईकोर्ट ने एसबीआई की मृतक आश्रित कोटे में विधवा को मृतक आश्रित कोटे में नौकरी देने के एक मामले में यह आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि विधवा के लिए आयु 40 वर्ष एवं अन्य के लिए 37 वर्ष रखने की नीति गलत नहीं है, क्योंकि विधवा एक अलग क्लास है। इस कारण आयु सीमा में छूट की नीति में कोई असंवैधानिकता नहीं है।


कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार समाज के भिन्न वर्गों में अलग अलग नीति अपना सकती है। विधवा को 40 साल और अन्य को 37 साल तक की आश्रित कोटे में नियुक्ति देने के नीतिगत निर्णय को सही ठहराने वाले एकल जज के फैसले को दो जजों की पीठ ने सही माना है और एकल जज के निर्णय के खिलाफ अपील खारिज कर दी।

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यह आदेश न्यायमूर्ति अरूण टंडन और ऋतुराज अवस्थी की खंडपीठ ने इटावा के प्रदीप कुमार निर्मल की अपील पर दिया है। याची के पिता एसबीआई कर्मी थे। गोली लगने से सेवा के दौरान उनकी मौत हो गयी थी। उसने मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति की मांग की। लेकिन बैंक ने नियुक्ति देने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि वह ओवर एज हो गया। इस पर मृतक की विधवा को नौकरी के लिए 40 वर्ष की आयु सीमा और अन्य के लिए 37 वर्ष उम्र रखने की वैधता को चुनौती दी गयी, जिसे कोर्ट ने सही नहीं माना और याचिका को खारिज कर दिया।
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