कनिष्ठ सहायक भर्ती परीक्षा में ट्रिपल सी प्रमाण पत्र नहीं रखने वाले अभ्यर्थियों को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने...

कनिष्ठ सहायक भर्ती परीक्षा में ट्रिपल सी प्रमाण पत्र नहीं रखने वाले अभ्यर्थियों को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने...

Akhilesh Kumar Tripathi | Publish: Oct, 13 2018 10:34:22 PM (IST) Allahabad, Uttar Pradesh, India

कोर्ट ने कहा है कि विज्ञापन की शर्तें पूरी न करने वाले अभ्यर्थियों को भर्ती में शामिल होने की छूट नहीं दी जा सकती

इलाहाबाद. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उ.प्र. अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की 2016 की कनिष्ठ सहायक भर्ती में आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि को ट्रिपल सी प्रमाण पत्र न रखने अभ्यर्थियों को तगड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने कहा है कि विज्ञापन की शर्तें पूरी न करने वाले अभ्यर्थियों को भर्ती में शामिल होने की छूट नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने सैकड़ों लोगों की दर्जनों याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति संगीता चन्द्रा ने संजय शर्मा व अन्य की याचिकाओं पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता सीमांत सिंह व आयोग के अधिवक्ता के. एस. कुशवाहा ने पक्ष रखा।

मालूम हो कि आयोग ने कनिष्ठ सहायक भर्ती विज्ञापन निकाला था, 11 मार्च 2016 को आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि थी। याचियों ने आवेदन दिए। लिखित व कम्प्यूटर टाइप टेस्ट में पास हो गए। उन्हें साक्षात्कार में यह कहते हुए नहीं बुलाया गया कि उनके पास फार्म जमा करने की अंतिम तिथि तक ट्रिपल सी सर्टिफिकेट नहीं था। इसलिए उन्हें भर्ती में शामिल होने का अधिकार नहीं है। क्योंकि विज्ञापन में ही स्पष्ट कर दिया गया था कि फार्म भरते समय ट्रिपल सी सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है। इसे चुनौती दी गयी। कोर्ट ने साक्षात्कार में शामिल करने का अंतरिम आदेश देते हुए जवाब मांगा।

याचियों का कहना था कि वे ट्रिपल सी पास थे, सर्टिफिकेट मिलने में देरी के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। ट्रिपल सी की योग्यता रखने के कारण उन्हें भर्ती में शामिल होने का अधिकार है। जब कि आयोग के अधिवक्ता कुशवाहा का कहना था कि विज्ञापन की शर्तों के विपरीत आवेदन स्वीकार्य नहीं है। यदि छूट दी गयी तो भर्ती प्रक्रिया अनिश्चित काल तक उलझी रहेगी और उन लोगो के साथ अन्याय होगा जिन्होंने शर्तो का पालन करते हुए सर्टिफिकेट न होने के कारण आवेदन नहीं दिया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों व न्यायिक फैसलों पर विचार करते हुए हस्तक्षेप से इंकार करते हुए याचिकायें खारिज कर दी।

 

BY- Court Corrospondence

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