पार्ट टाइम ट्यूबवेल आॅपरेटरों को भी नियमित की तरह मिले वेतनः हाईकोर्ट

पार्ट टाइम ट्यूबवेल आॅपरेटरों को भी नियमित की तरह मिले वेतनः हाईकोर्ट
Allahabad High Court

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को दिया निर्देश

इलाहाबाद. उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने पार्टटाइम ट्यूबवेल आॅपरेटरों को नियमित कर्मचारियों के समान वेतन देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के सुरेश चन्द्र तिवारी केस में दिये गये निर्देशों का पालन करने को कहा है। कोर्ट ने एकलपीठ के फैसले को संशोधित करते हुए राज्य सरकार की अपील निस्तारित कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरूण टंडन और न्यायमूर्ति रेखा दीक्षित की खण्डपीठ ने दिया है। 




गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 22 दिसम्बर 1981 को 2174 पार्ट टाइम ट्यूबवेल आॅपरेटर के अस्थायी पद सृजित किया। 73 आॅपरेटरों ने श्रम न्यायालय में समान कार्य समान वेतन की मांग में वाद दायर किया। 15 जुलाई 1989 को अवार्ड हो गया। 20 फरवरी 1992 को इन आॅपरेटरों को ट्यूबवेल सहायक बना दिया गया जिन्हें अवार्ड दिया गया था। 





इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी सरकार को राहत नहीं मिली। उन्हें समान वेतन दिया गया। अन्य आपरेटरों ने भी याचिका दाखिल की। कोर्ट ने समान वेतन का आदेश दिया। अंततः मामला सुप्रीम कोर्ट गया। राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी दी और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी आपरेटरों को समान वेतन का हकदार माना है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को 18 मई 1994 से सभी आपरेटरों को नियमित आपरेटरों के समान वेतन देने का आदेश दिया है।

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