scriptAllahabad High Court said - Sections 4 and 5 of CrPC do not apply to o | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- सीआरपीसी की धारा 4 और 5 आईपीसी के तहत अपराधों पर लागू नहीं होती | Patrika News

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- सीआरपीसी की धारा 4 और 5 आईपीसी के तहत अपराधों पर लागू नहीं होती

यह आदेश जस्टिस कौशल जयेंद्र ठाकर और जस्टिस गौतम चौधरी की खंडपीठ ने मोहर पाल और अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने आदेश पारित करते हुए कहा कि सीआरपीसी की धारा 4 और 5 उस प्रक्रिया से संबंधित है जहां एक विशेष अधिनियम के तहत अपराध किया जाता है।

इलाहाबाद

Updated: July 01, 2022 05:51:06 pm

प्रयागराज: एफआईआर रद्द करने की मांग पर की गई याचिका की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 4 और 5 के प्रावधान भारतीय दंड संहिता के तहत किए गए अपराधों पर लागू नहीं होते हैं और ये प्रावधान तब लागू होते हैं जब कोई विशेष अधिनियम लागू होता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- सीआरपीसी की धारा 4 और 5 आईपीसी के तहत अपराधों पर लागू नहीं होती
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- सीआरपीसी की धारा 4 और 5 आईपीसी के तहत अपराधों पर लागू नहीं होती
यह आदेश जस्टिस कौशल जयेंद्र ठाकर और जस्टिस गौतम चौधरी की खंडपीठ ने मोहर पाल और अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने आदेश पारित करते हुए कहा कि सीआरपीसी की धारा 4 और 5 उस प्रक्रिया से संबंधित है जहां एक विशेष अधिनियम के तहत अपराध किया जाता है।
यह है पूरा मामला

आईपीसी की धारा 420ए, 406 और 120बी के तहत दर्ज एफआईआऱ को रद्द करने की प्रार्थना की थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि सूचना देने वाले ने याचिकाकर्ता क्रमांक 1 से रियायती दरों पर मशीनें ली थीं। याचिकाकर्ता मोहर पाल को सूचना देने वाले के बैंक से रु. 2,03,280/- का बैंक लेनदेन किया गया। हालांकि, बैंक खाते से पैसे दिए जाने के बावजूद सूचना देने वाले को कोई मशीन नहीं दी गई।
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इसके बाद कमलेश सिंह, जिसे पैसा भेजा गया था, ने कमीशन काटकर चेक जारी किया। राशि की वसूली नहीं की जा सकी और इसलिए, मुखबिर ने फिर से अपने भाई के साथ दोनों आरोपियों से अनुरोध किया लेकिन उन्होंने परिसर को बंद कर दिया और उपलब्ध नहीं हैं। 2021 में, अदालत ने जांच का निर्देश दिया क्योंकि यह प्रथम दृष्टया पाया गया कि आरोपी द्वारा एक संज्ञेय अपराध किया गया है और आरोप पत्र दायर किया गया था।

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