इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंजाब से छुड़ाए गए यूपी के मजदूरों के पुनर्वास पर योगी सरकार से मांगा जवाब

पंजाब के ईंट भट्ठों से छुड़ाए गए मुजफ्फर नगर और मेरठ के 88 बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक यूपी सरकार से हफ्ते में मांगा।

इलाहाबाद. हाईकोर्ट इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पंजाब के ईंट-भट्ठों से छुड़ाये गये मुजफ्फरनगर व मेरठ के 88 बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास मामले में राज्य सरकार से एक हफ्ते में जवाब मांगा है।


यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डी.बी. भोसले तथा न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खण्डपीठ ने मजदूरों को चिकित्सा सुविधा सहित पुनर्वास की आर्थिक सहायता दिये जाने की मांग में दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। राज्य सरकार का कहना है कि छुड़ाये गये बंधुआ मजदूरों के खाने-पीने व चिकित्सा निवास की व्यवस्था की गयी है। क्योंकि उनके बंधुआ मजदूर होने का मुकदमा पंजाब में चल रहा है। ऐसे में पंजाब सरकार के निर्देश प्राप्त होने पर नियमानुसार आर्थिक मदद दी जा सकती है।

 

कोर्ट ने कहा कि बंधुआ मजदूरों की आर्थिक मदद सहित तात्कालिक सहायता के लिए प्रत्येक जिले में फण्ड दिया गया है, तो जिलाधिकारी को नियमानुसार आर्थिक मदद करनी चाहिए। पंजाब से छुड़ाये गये बंधुआ मजदूरों में से 41 मुजफ्फरनगर व शेष मेरठ के हैं। उनकी चिकित्सा कराकर उनके घरों को भेज दिया गया है।

 

सरकार विभिन्न योजनाओं से उनकी आर्थिक मदद कर रही है। पंजाब के ईंट-भट्ठों से बरामद मजदूरों का मुकदमा पंजाब में ही चल रहा है। ऐसे में डीएम आर्थिक मदद देने के लिए बाध्य नहीं किये जा सकते। कोर्ट ने राज्य सरकार से छुड़ाये गये मजदूरों को दी गयी आवास चिकित्सा, भोजन व्यवस्था पर उठाये गये कदमों का पूरा ब्यौरा जवाबी हलफनामे में दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई एक हफ्ते बाद होगी।


फीस बढ़ोत्तरी पर डीपीएस गाजियाबाद को नोटिस
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार व सी.बी.एस.ई. से उत्तर प्रदेश में स्कूलों के व्यवसायिकरण के खिलाफ याचिका पर जवाब मांगा है और डीपीएस गाजियाबाद, वसुंधरा की प्रबंध समिति को नोटिस जारी की है।

 

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डी.बी.भोसले तथा न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खण्डपीठ ने गाजियाबाद पैरेंट एसोसिएशन के सदस्य नीरज भटनागर की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका में प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूली की वैधता को चुनौती दी गयी। याची का कहना है कि डी.पी.एस. गाजियाबाद वसुंधरा पिछले तीन सालों से प्रतिवर्ष शिक्षा शुल्क में बढ़ोत्तरी कर रहा है जब कि सीबीएसई नियमावली के तहत ऐसा नहीं किया जा सकता।

 

याची की लड़की कक्षा आठ की छात्रा है। हर वर्ष भारी फीस वसूली की जा रही है। स्कूल ट्रस्ट इसकी आय दूसरे ट्रस्ट में स्थानान्तरित कर रहा है। नियमानुसार स्कूल के रखरखाव के लिए फीस ली जा सकती है। याचिका में डी.पी.एस.स्कूल की आडिट किये जाने की मांग की गयी है। धनराशि की वापसी की जाए और छात्रों को वापस की जाए।
Court Correspondence

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रफतउद्दीन फरीद
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