हर कीमत पर बेटी को पाकिस्तान से वापस लाएंगेः परिजन

हर कीमत पर बेटी को पाकिस्तान से वापस लाएंगेः परिजन
Indin girls Geeta-3

Shribabu Gupta | Updated: 11 Aug 2015, 07:59:00 PM (IST) Allahabad, Uttar Pradesh, India

गीता हमारी ही बेटी है और मैं उसे पाकिस्तान से लाने के लिये अपना डीएनए टेस्ट कराने के लिए तैयार हूं...

इलाहाबाद। गीता हमारी ही बेटी है और मैं उसे पाकिस्तान से लाने के लिये अपना डीएनए टेस्ट कराने के लिए तैयार हूं। यह कहना है प्रतापगढ़ के महेशगंज क्षेत्र के धमोहन गांव के राजाराम का। राजाराम का दावा है कि पाकिस्तान की गीता उन्ही की बेटी है जो 2004 में बिहार से अपने मामा के मठ से खो गयी थी। राजाराम और उनकी पत्नी अनारा देवी कहती हैं कि वे अपनी बेटी को पाकिस्तान से लाने के लिये कोई कोरकसर नहीं छोडेंगे। वे हर वह साक्ष्य देगें जिससे उनकी मूकबधिर बेटी गीता पाकिस्तान से आ सके।

अत्यन्त भावुक राजाराम पाकिस्तान के उस परिवार को बार बार दुआ देता है,जिसने उनकी बेटी को अपने यहां अपनी बेटी की तरह रख रखा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी पाकिस्तान में रह रही मूकबधिर गीता को वापस लाने की पहल करते हुए प्रतापगढ के जिलाधिकारी को इस सम्बन्ध में साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए हैं।

यादव ने जिलाधिकारी से गीता के परिजनों से साक्ष्य जुटाने के लिए कहा है। साक्ष्य को केन्द्र सरकार के माध्यम से पाकिस्तान भेजा जाएगा ताकि गीता अपने वतन वापस आ सके। दावा किया गया है कि मूकबधिर लडकी गीता प्रतापगढ़ के महेशगंज क्षेत्र के धमोहन गांव की रहने वाली है।

गीता के पिता राजाराम और मां अनारा देवी का दावा है कि गीता तो उनकी बेटी सविता है। मीडिया से जानकारी मिलने के बाद वे अपनी बेटी को पाने के लिये जिलाधिकारी से लेकर मुममंत्री तक से गुहार लगा रहे हैं।

स्थानीय पुलिस ने गीता के माता पिता के जिलाधिकारी और सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने की व्यवस्था की। उन्होने लखनऊ में कुछ अधिकारियों से मुलाकात भी की है। पिता के अनुसार गीता 2004 में बिहार के सारण जिले में स्थित अपने मामा के मठ से बिछुड़ गई थी!

रामराज का साला छोटे 16 साल की उम्र में घर छोड़कर बिहार भाग गया था। वहां सलेमपुर छपरा में गौशाला मठिया नानकशाही मठ में वह बाबा ओमप्रकाश दास की शरण में रहने लगा। बाबा ओमप्रकाश का निधन हो जाने पर छोटे का नामकरण बाबा नारायणदास कर दिया गया और वह मठ का महंत हो गया।

बाबा नारायणदास करीब 23 साल बाद अपने घर रामापुर आये तो परिजनों को उनके जुदा होने और मठ का महंत होने की जानकारी मिली। मई 2004 में अनारा देवी अपने बच्चों एवं पति के साथ भाई बाबा नारायणदास के पास छपरा गई थी। मंझली बेटी सविता (8) मूक बधिर थी।  अनारा सविता को वहीं छोड़ अन्य बच्चों व पति के साथ घर लौट आई थी।

कुछ समय बाद सविता आश्रम से गायब हो गई। मामा नारायणदास ने बहन को जानकारी दी तो अनारा आश्रम पहुंची। कुछ महीनों तक आसपास के गांवों में तलाश किया गया। कुछ पता नहीं चलने पर एक नवंबर 2004 को नारायणदास ने छपरा थाने में सूचना दी थी, लेकिन पता नहीं चला। गीता का इंतजार चल ही रहा था कि समाचार चैनलों पर पाकिस्तान में उसके मिलने की खबर आनी शुरू हुई जिसे देख लोगों ने रामराज व उनकी पत्नी अनारा को इस बारे में बताया।

उसके बाद बेजुबान बेटी की तस्वीर लेकर वे महेशगंज थाने आए और बेटी को पाकिस्तान से लाने के लिए मदद का आग्रह किया। जिलाधिकारी ने दोनो को बुलाकर पूछताछ की और बेटी को पाकिस्तान से वापस लाने के लिए विदेश मंत्रालय से संपर्क साधा गया।

हालांकि गीता को अपनी संतान बताने के लिये देश से चार परिवार सामने आये हैं। उत्तर प्रदेश के अलावा झारखंड,बिहार और पंजाब के भी एक परिवार ने गीता को अपनी संतान बताया है। राजाराम की सविता जब पाकिस्तान पहुंची तो उसे एक सवयं सेवी संस्था को सौंप दिया गया और वहीं उसे गीता नाम मिला।
Show More
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned