UP Board 2018 :यूपी बोर्ड आखिर क्यों वित्तविहीन विद्यालयों पर मेहरबान, परीक्षा केंद्र निर्धारण में राजकीय विद्यालयों की उपेक्षा

arun ranjan

Publish: Dec, 08 2017 01:45:28 (IST) | Updated: Dec, 08 2017 01:49:39 (IST)

Allahabad, Uttar Pradesh, India
UP Board 2018 :यूपी बोर्ड आखिर क्यों वित्तविहीन विद्यालयों पर मेहरबान, परीक्षा केंद्र निर्धारण में राजकीय विद्यालयों की उपेक्षा

परीक्षा केंद्र निर्धारिण में सिफारिशों का जोर, सर्वाधिक वित्तविहीन विद्यालयों को बनाया गया परीक्षा केंद्र

इलाहाबाद. यूपी बोर्ड की ओर से परीक्षा केद्रों के निर्धारण में वित्तविहीन विद्यालयों ज्यादा मेहरबानी देखने को मिल रही है। इस बार राजकीय काॅलेज व एडेड काॅलेज की अपेक्षा सर्वाधिक वित्तविहीन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया। जिसके पीछे मुख्य वजह परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में सिफारिशों का जोर माना जा रहा है।

यूपी बोर्ड 2018 की परीक्षा फरवरी से प्रारंभ हो रही है। परीक्षा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। परीक्षा कंद्रों के निर्धारण की प्रक्रिया भी करीब पूरी होने के कगार पर है। यूपी बोर्ड ने इस बार नकलविहीन परीक्षा कराने के लिए आॅनलाइन परीक्षा कंेद्रों का निर्धारण किया है। परीक्षा केंद्रों के निर्धारण के लिए बोर्ड ने मानक तय कर रखे थे। जिसके तहत प्रदेश के विद्यालयों की एक दूसरे के बीच की दूरी, विद्यार्थियों की संख्या, सीसीटीवी कैमरे की स्थिति, मूलभूत स्थिति सहित अन्य चीजों का ध्यान रखा गया था।

इसी मानक के अनुरूप सभी परीक्षा केद्रों की आॅनलाइन फिडिंग की गई थी। इसी के आधार पर साॅफ्टवेयर से परीक्षा केंद्र निर्धारित होने थे। परिषद ने जो सूची जारी की है उसमंे राजकीय और एडेड विद्यालयों की अपेक्षा वित्तविहीन को ज्यादा तवज्जो दी गई है। अगर केवल इलाहाबाद की बात की जाए तो बोर्ड ने अंतिम सूची में कुल 297 विद्यालयों को केंद्र बनाया था। वहीं चार दिन पहले डीआईओएस ने फाइनल सूची जारी की उसमें से 11 विद्यालयों को बदल दिया गया।

इसके साथ ही 26 अतिरिक्त को परीक्षा कंेद्र बना दिया गया। इसमें 6 जीजीआईसी व जीआईसी, 4 एडेड और 16 वित्तविहीन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया। यानि यहां भी वित्तविहन विद्यालयों पर ज्यादा जोर दिया गया। ऐसे में माना जा रहा है कि परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में सिफारिशों का असर ज्यादा रहा है। हालंाकि इस संबंध मंें जिम्मेदार अधिकारी कोई भी बयानबाजी करने से बच रहे हैं।

24342 विद्यालयों के मिले थे आवेदन

परीक्षा केंद्र बनाने संबंधित शासन का निर्देश मिलते ही प्रदेशभर से 24342 विद्यालयों ने आवेदन किया। इसमंें से राजकीय विद्यालयों की संख्या 1910, एडेड की 4531 और 17901 वित्तविहीन विद्यालयों की संख्या थी। आवेदन मिलने के बाद 18 नवंबर को विभाग की ओर से सूची जारी की गई। 1910 राजकीय विद्यालयों में से मात्र 377 को और एडेड के 4531 में से 3437 विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया।

जबकि 4243 वित्तविहीन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र की सूची में तवज्जो दी गई। वहीं डीआईओएस की अंतिम सूची में कई विद्यालयों की संख्या घटाई और बढ़ाई गई। इस दौरान भी वित्तविहीन विद्यालयों को ही परीक्षा केंद्र बनाया गया।

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