फ्रैक्चर के बावजूद दौड़ में हिस्सा लेने वाले अभ्यर्थी को फेल करने पर 10 हजार हर्जाना

फ्रैक्चर के बावजूद दौड़ में हिस्सा लेने वाले अभ्यर्थी को फेल करने पर 10 हजार हर्जाना

Akhilesh Tripathi | Publish: Sep, 04 2018 09:14:51 PM (IST) Allahabad, Uttar Pradesh, India

मेडिकल बोर्ड ने माना दौड़ लगाना संभव नहीं, कोर्ट ने छह हफ्ते बाद टेस्ट लेने का दिया निर्देश

इलाहाबाद. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मृतक आश्रित कोटे में दरोगा पद पर याची का छह हफ्ते बाद शारीरिक दक्षता टेस्ट लेने का निर्देश दिया है। टेस्ट जाते समय दुर्घटना में याची घायल हो गया और पैर की हड्डी टूट गयी। फिर भी अधिकारियों ने दुर्घटना के तीसरे दिन लिये गये टेस्ट में उसे फेल कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जिसकी पैर की हड्डी टूट गई और वह चार सौ मीटर मैदान का दस राउण्ड नहीं लगा सकता। बारह राउण्ड न लगा पाने के कारण उसे फेल कर दिया गया। कोर्ट ने अधिकारियों पर दस हजार रूपये का हर्जाना लगाया है और कहा है कि याची के पैर में सूजन है। ऐसे में उसे नियुक्त न करने का आदेश मनमानापूर्ण है।

यह आदेश न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र ने मथुरा के आरिफ अली की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने याची की नियुक्ति संबंधी पत्रावली सीज कवर लिफाफे में एसएसपी मथुरा की अभिरक्षा में रखे जाने का आदेश दिया है। याचिका पर अधिवक्ता ओम प्रकाश सिंह ने बहस की। मालूम हो कि याची ने मृतक आश्रित कोटे में अर्जी दी। उसे उपनिरीक्षक पद पर चयन में शारीरिक दक्षता टेस्ट के लिए बुलाया गया। याची दुर्घटनाग्रस्त हो गया फिर भी तीसरे दिन उसका टेस्ट लेकर असफल घोषित कर दिया गया जिसे चुनौती दी गयी।

कोर्ट के निर्देश पर सीएमओ ने अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से जांच करायी। याची का कहना था कि वह दौड़ नहीं सकता और चयन बोर्ड ने कहा कि वह मानक के अनुरूप दौड़ नहीं सका। मेडिकल बोेर्ड ने याची की जांच कर उसके कथन की पुष्टि की। इस पर कोर्ट ने कहा कि जिसका पैर फ्रैक्चर हो वह कैसे दौड़ सकता है। इसलिए चार सौ मीटर का दस राउण्ड लगाने की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया जा सकता। मेडिकल बोर्ड ने भी कहा है कि याची दौड़ नहीं सकता। इसलिए छह हफ्ते बाद टेस्ट लिया जाए और नियमानुसार कार्यवाही की जाए।

 

BY- Court Corrospondence

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