सीएए के खिलाफ चौदह दिनों से लगातार चल रहा प्रदर्शन जारी ,बेबस दिख रहा प्रशासन

बच्चों की बोर्ड परीक्षा को लेकर परेशान महिलाएं

प्रयागराज | नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में शहर के मंसूर अली पार्क में पिछले चौदह दिनों से महिलाओं का धरना लगातार जारी है। कड़ाके की ठंड के बावजूद मुस्लिम महिलाओं का यह धरना पूरे चौबीसों घंटे चल रहा है। इस धरने में स्थानीय कस्बों और आस.पास के जिलों के साथ ही प्रदेश के दूसरे शहरों की महिलायें भी जुड़ रही हैं। धरना दे रही मुस्लिम महिलायें नागरिकता संशोधन कानून को केन्द्र सरकार वापस लेने की मांग कर रही हैं। इसके साथ ही एनआरसी को भी न लागू करने की मांग कर रही हैं। मुस्लिम महिलाओं का आरोप है कि इस धरने तके चलते जहां उनके घरेलू काम काज पर असर पड़ रहा है।


बच्चो की बोर्ड परीक्षाएं

धरने पर बैठी महिलाओं के बच्चों की बोर्ड की परीक्षायें भी जल्द होने वाली है। इसको लेकर भी परेशान है। महिलाओं का आरोप है कि सीएए के बाद उनसे नागरिकता साबित करने के लिए कागजात मांगे जायेंगे और कागजात न दे पाने की स्थिति में उन्हें डिटेंशन सेंटरों में भेज दिया जायेगा। महिलाओं ने कहा है कि देश की आजादी के समय उनके पूर्वज अपनी मर्जी से भारत में रहे थे और वे पूरी तरह से भारतीय हैं। इसलिए ऐसा कोई कानून जो देश के संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उसे वापस लिये जाने तक उनकी ये सरकार से लड़ाई जारी रहेगी। हांलाकि पुलिस और प्रशासन ने कई बार प्रदर्शकारी महिलाओं को धरने से हटाने और पार्क को खाली कराने की भी कोशिश की। लेकिन भारी भीड़ के चलते यह कोशिश नाकाम रही। शान्तिपूर्ण ढ़ंग से चल रहे इस विरोध प्रदर्शन की ख़ास बात यह है कि इस आंदोलन की कमान बुर्कानशीं मुस्लिम महिलाओं ने संभाल रखी है। आंदोलन में लगातार महिलाओं की भीड़ बढ़ने के चलते प्रशासन भी लाचार नज़र आ रहा है।


भेजी जा रही नोटिस

पुलिस ने बगैर अनुमति के चल रहे इस धरने में शामिल ढाई सौ लोगों के खिलाफ धारा 144 के उल्लंघन के आरोप में 14 जनवरी को मुकदमा भी दर्ज कर लिया गया था । लोगों को अब नोटिसें भी भेजी जा रही हैं। लेकिन केस दर्ज होने और नोटिसें तामील होने के बावजूद प्रदर्शनकारी महिलायें झुकने को कतई तैयार नहीं हैं। नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी के विरोध में प्रयागराज की मुस्लिम महिलाओं का यह आंदोलन रविवार 12 जनवरी से शुरू हुआ है। धरने पर बैठी मुस्लिम महिला प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वह तब तक पीछे नहीं हटेंगी जब तक केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन कानून को वापस नहीं ले लेती है।

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प्रसून पांडे
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