गोरखपुर दंगा मामला: योगी आदित्यनाथ के खिलाफ याचिका पर अब 31 जुलाई को सुनवाई

गोरखपुर दंगा मामला: योगी आदित्यनाथ के खिलाफ याचिका पर अब 31 जुलाई को सुनवाई
Yogi adityanath

याचिका में 2007 में गोरखपुर में हुए दंगे मामले को लेकर दायर याचिका में सीएम योगी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग 

इलाहाबाद. 2007 के गोरखपुर दंगा मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में  याचिका की पोषणीयता पर शुक्रवार को बहस शुरु हुई। परवेज परवाज और असद हयात की दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस कृष्ण मुरारी की अध्यक्षता वाली खण्डपीठ ने 31 जुलाई फिर मामले की सुनवाई के लिए तिथि दी। बता दें कि 2007 में गोरखपुर में हुए दंगे मामले को लेकर दायर याचिका में सीएम योगी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की गई है।



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क्या था पूरा मामला 
गोरखपुर में 2007 में 26 व 27 जनवरी की रात में मोहर्रम जुलुस निकल रहा था। जुलूस में अचानक से दो पक्षों में विवाद शुरू हो गया। कुछ ही पल में यह विवाद खूनी खेल में तब्दील हो गया। पुलिस के हस्तक्षेप के बावजूद मामला बेकाबू हो चला। कोतवाली थाना क्षेत्र के झंकार सिनेमा के पास पुलिस की गाड़ी से राजकुमार अग्रहरि नामक युवक को खींचकर गुस्साई भीड़ ने चाकू मारकर हत्या कर दी। 




इस हत्याकांड के बाद मामले ने अचानक सांप्रदायिक रंग ले ली। धरना-प्रदर्शन होने लगा। महाराणा प्रताप चौराहा पर बीजेपी के बड़े नेताओं की अगुवाई में सभा हुई। बताया जाता है कि इस सभा में वक्ताओं ने भड़काऊ भाषण दिए। भड़काऊ भाषण देने वालों में तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ भी थे। आरोप लगा कि उनके भाषण के बाद ही दंगा भड़क गया। इस दंगे में राशिद नाम के एक युवक की भी जान गई। 



राशिद की मौत के बाद वादी बने परवेज परवाज ने केस दर्ज कराया। वादी के अनुसार वह भाषण के दौरान वहां से गुजर रहे थे। वादी परवेज ने कैण्ट इंस्पेक्टर को तहरीर देकर विवादित बयान देने और उसके बाद भड़के दंगे में हुई राशिद की हत्या के मामले में मुकदमा दर्ज करने की अपील की। थाने में मुकदमा दर्ज नहीं हुआ तो वादी परवेज परवाज ने न्यायालय की शरण ली। इसके बाद योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने व उन्माद फैलाने की धाराओं सहित 302, 153ए, 153बी, 295, 295बी, 147, 143, 427, 452 के तहत कैण्ट थाना में मुकदमा दर्ज किया गया। 



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