वाराणसीः ज्ञानवापी मस्जिद की जांच पर रोक लगाने की मांग, अंजुमन इंतजामिया कमेटी पहुंची हाईकोर्ट

अंजुमन इंतजामिया कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad Highcourt) का रुख किया है व आठ अप्रैल को वाराणसी फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi masjid) की एएसआई जांच कराने के आदेश को चुनौती देते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की है।

By: Abhishek Gupta

Published: 13 Apr 2021, 05:51 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क.

वाराणसी. वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) व ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) का मामला एक बार फिर कोर्ट पहुंच गया है। इस बार अंजुमन इंतजामिया कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad Highcourt) का रुख किया है व आठ अप्रैल को वाराणसी फास्ट ट्रैक कोर्ट (Varanasi Court) द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद की एएसआई (ASI) जांच कराने के आदेश को चुनौती देते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की है। दायर की गई याचिका में कहा गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले ही मामले पर फैसला सुरक्षित रख चुका है। ऐसे में फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा एएसआई जांच के आदेश देना गलत है। हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए। अर्जी में कहा गया है कि याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई कर वाराणसी न्यायालय के आदेश पर रोक लगाई जाए। अर्जी में यह भी कहा गया है कि वाराणसी न्यायालय ने पूजा स्थलों (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 के आदेश की अनदेखी की है।

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मस्जिद के प्रबंधन समिति का कहना है कि इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला पहले से ही सुरक्षित है। जबकि वाराणसी कोर्ट ने हिंदी पक्ष की अर्जी पर अपना फैसला सुनाया है। स्थानीय अदालत का आदेश न्याय की भावना के खिलाफ है। अंजुमन इंतेजामिया समिति का कहना है कि निचली अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाकर 'प्लेसेज ऑफ वरशिप' एक्ट 1991 की अवहेलना की है। वहीं हिंदू पक्ष ने भी मंगलवार को कैविएट दाखिल कर हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि वह बिना उसका पक्ष सुने मामले में कोई आदेश पारित न करे। हिंदू पक्ष की ओर से मां श्रृंगार गौरी, आदि विशेश्वर और आठ श्रद्धालुओं को पक्षकार बनाया गया है।

आठ अप्रैल को आया था यह आदेश-
गुरुवार 8 अप्रैल, 2021 को वाराणसी कोर्ट के जज आशुतोष तिवारी ने भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (एएसआई) को मामले में जांच करने की मंजूरी दे दी। साथ ही कहा कि जांच का खर्च भी राज्य सरकार उठाएगी। कोर्ट ने केंद्र व उत्तर सरकार को पत्र के जरिए इस मामले में पुरातत्व विभाग की पांच लोगों की कमेटी बनाने व खुदाई करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कमेटी में 2 अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को भी रखने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने सर्वे कराकर आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि सर्वेक्षण कराने का आदेश देने के पीछे मक़सद यह है कि इससे पता चलेगा कि विवादित स्थल पर जो धार्मिक ढांचा है क्या वह किसी के ऊपर रखा गया है, इसमें किसी तरह का परिवर्तन किया गया है या जोड़ा गया है या फिर एक ढांचे को परस्पर दूसरे के ऊपर या साथ में रखा गया है।

Abhishek Gupta
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