सुप्रीम कोर्ट के बाद दोबारा हाईकोर्ट आने वाले कांसटेबल पर दस हजार हर्जाना

याचिका में महानिदेशक को समादेश जारी कर विचाराधीन अर्जी को निर्णीत करने की मांग की गई थी

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट तक मुकदमा हारने के बाद दोबारा हाईकोर्ट में दाखिल याचिका को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए खारिज कर दिया है और याची पर 10 हजार का हर्जाना लगाया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एम के गुप्ता ने बर्खास्त सीआरपीएफ कांस्टेबल इंद्रजीत सिंह की याचिका पर दिया है । मालूम हो कि याची के खिलाफ शिकायत की विभागीय जांच की गई। जिसमें उसे दोषी पाते हुए 30 जून 2005 को बर्खास्त कर दिया गया।

इस आदेश के खिलाफ विभागीय अपील ,पुनर्विचार याचिका भी खारिज हो गई। इन आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने भी हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने भी एस एल पी खारिज कर दी । इसके बाद याची ने नियम 30 के अंतर्गत महानिदेशक सीआरपीएफ के समक्ष अर्जी दी ।और कहा कि उसकी शिकायत सुनी जाए।

इस नियम के अंतर्गत महानिदेशक को ऐसी शिकायतों को सुनने का अधिकार है, जो अधीनस्थ कर्मचारियों के द्वारा की गई हो। इस धारा के तहत कोई अपील सुनने का अधिकार नहीं है। जब सुप्रीम कोर्ट से एस एल पी खारिज हो गई तो उसके बाद नियम 30 के तहत महानिदेशक के समक्ष आवेदन देना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। याचिका में महानिदेशक को समादेश जारी कर विचाराधीन अर्जी को निर्णीत करने की मांग की गई थी।

Ashish Shukla Desk
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