यूपी के 2823 शिक्षकों को बड़ा झटका हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश काे बरकरार रखा

  • बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कर दिए थे शिक्षक बर्खास्त
  • बर्खास्तगी के आदेश के खिलाफ हाईकाेर्ट गए थे शिक्षक

By: shivmani tyagi

Updated: 26 Feb 2021, 06:47 PM IST

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क इलाहाबाद
वर्ष 2005 में डॉ बी आर अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की B.Ed की फर्जी डिग्री के आधार पर प्रदेश के अलग-अलग प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त 2823 सहायक अध्यापकों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. हाईकोर्ट ने इन सहायक अध्यापकों के अंकपत्र, डिग्री और नियुक्ति रद्द करने के साथ-साथ बर्खास्तगी के आदेशों को सही माना है और किसी भी तरह के हस्तक्षेप से साफ इनकार कर दिया है। ऐसे में साफ है कि अब इन सभी सहायक अध्यापकों की बर्खास्तगी बरकरार रहेगी।

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यह आदेश जस्टिस एमएन भंडारी और जस्टिस सौरभ श्याम शमशेर की खंडपीठ ने दिया है। अदालत ने अंकपत्रों से छेड़छाड़ के आरोपी 1812 अध्यापकों को 4 महीने की राहत दी है। आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति की निगरानी में उनकी जांच पूरी करने के आदेश दिए हैं। इस जांच रिपोर्ट के बाद जो अध्यापक सही पाए जाएंगे उनकी नौकरी बचेगी बाकी सभी की बर्खास्तगी बरकरार रहेगी। इसके अलावा हाईकोर्ट ने सात अध्यापकों के सत्यापन के लिए एक महीने का समय दिया है। बता दें कि यह सभी वह अध्यापक हैं जिन्होंने 2005 में डॉ बी आर अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की B.Ed की फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी हांसिल की थी। दरअसल जब इन लोगों के दस्तावेजों की जांच की गई थी तो उन्होंने अपना पक्ष नहीं रखा था और इसके बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इन सभी को बर्खास्त कर दिया था बेसिक शिक्षा अधिकारी के बर्खास्तगी के आदेश के खिलाफ यह लोग हाईकोर्ट चले गए थे।

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हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले पर अपना फैसला देते हुए गुरु के महत्व को भी समझाया है और कहा है कि शिक्षा एक पवित्र व्यवसाय है। यह जीविका का साधन मात्र नहीं है, राष्ट्र के निर्माण में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में अगर कोई छल से शिक्षक बनता है तो उसकी नियुक्ति को शुरू से ही रद्द माना जाएगा। अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि इन लोगों ने केवल छल कपट से नौकरी ही हांसिल नहीं की बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य से भी खिलवाड़ किया है। इसके साथ ही समाज में जो शिक्षकों का सम्मान है उसको भी ठेस पहुंचाई है।

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