सिविल पुलिस और पीएसी में कॉन्स्टेबल भर्ती मामला, हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड किया तलब

कोर्ट ने 2015 और 2018 की भर्ती का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है।

By: Akhilesh Tripathi

Updated: 06 Jan 2020, 08:15 PM IST

प्रयागराज. सिविल पुलिस और पीएसी में कांस्टेबलों की भर्ती के लिए 2015 में जारी विज्ञापन में कुछ पद रिक्त रह जाने के मामले में हाईकोर्ट ने डीआईजी स्थापना को तलब किया है। कोर्ट ने 2015 और 2018 की भर्ती का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। पूछा है कि कितने पद बिना भरे रह गये हैं। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि जब 2018 की भर्ती का विज्ञापन 2015 की भर्ती का परिणाम जारी होने से पहले ही आ गया था तो 2015 की भर्ती में बचे पदों को किस प्रकार से 2018 की भर्ती में कैरी फारवर्ड किया गया। याचिका की अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी।

ओमप्रकाश मिश्र और अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर न्यायमूर्ति एम.सी.त्रिपाठी सुनवाई कर रहे हैं। याचीगण की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना था कि 2015 की भर्ती में कई पद रिक्त रह गये हैं। कट आफ मेरिट नीचे लाकर इन पदों को भरा जाए। कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश सरकार से जानकारी मांगी थी। सरकार के अधिवक्ता ने बताया कि सभी पद भरे जा चुके हैं, कोई भी पद रिक्त नहीं है। याचीगण के अधिवक्ता ने इसका जबरदस्त विरोध किया। कहा कि प्रावधान किया गया था कि यदि कोई पद रिक्त रह जाता है तो वह अगली भर्ती के लिए कैरीफारवर्ड किया जायेगा। जबकि भर्ती बोर्ड खुद ही कह रहा है कि बचे पदों को भर दिया गया है।

दूसरी ओर बोर्ड का यह भी कहना है कि रिक्त रह गये पदों को 2018 की भर्ती में कैरी फारवर्ड किया गया है। ऐसा संभव नहीं है क्योंकि 2015 की भर्ती का परिणाम 15 मई 2018 को जारी हुआ जबकि 2018 की भर्ती का विज्ञापन जनवरी 2018 में ही जारी कर दिया गया था। वकीलों का कहना था कि भर्ती बोर्ड इस मामले में स्वयं भ्रमित है और कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।

BY- Court Corrospondence

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