scriptHigh Court granted bail to the chief minister who threatened | मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी देने वाले सख्स को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत | Patrika News

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी देने वाले सख्स को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

डॉ.अयूब ने कथित तौर पर साल 2016 में गोरखपुर के तत्कालीन सांसद और वर्तमान सीएम योगी आदित्यनाथ को मारने की धमकी दी गई थी। डॉ. अयूब के खिलाफ हिंदू युवा वाहिनी संगठन के अध्यक्ष के कहने पर मामला दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एक सार्वजनिक मंच से डॉ अयूब ने तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ को यह कहकर गाली दी थी कि योगी आतंकवादी है और गोरखनाथ मंदिर पर कब्जा कर लिया है।

इलाहाबाद

Published: May 02, 2022 05:12:50 pm

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी देने वाले पास पार्टी अध्यक्ष को अग्रिम जमानत मंजूर कर दी है। कोर्ट ने 2016 में दर्ज मामले को लेकर पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अयूब को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खिलाफ एक सार्वजनिक रैली में कथित बयान देने के मामले में जमानत दी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी देने वाले सख्स को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी देने वाले सख्स को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत
2016 का है मामला

बतादें कि डॉ.अयूब ने कथित तौर पर साल 2016 में गोरखपुर के तत्कालीन सांसद और वर्तमान सीएम योगी आदित्यनाथ को मारने की धमकी दी गई थी। डॉ. अयूब के खिलाफ हिंदू युवा वाहिनी संगठन के अध्यक्ष के कहने पर मामला दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एक सार्वजनिक मंच से डॉ अयूब ने तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ को यह कहकर गाली दी थी कि योगी आतंकवादी है और गोरखनाथ मंदिर पर कब्जा कर लिया है। जहां कहीं भी पाए गए उन्हें मार डालेंगे।
इन धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा

सीएम योगी के खिलाफ धमकी देने के बाद अयूब के खिलाफ आईपीसी की धारा 295ए, 500, 504, 505, 506 के तहत मामला दर्ज किया गया और जांच पूरी होने के बाद अप्रैल 2017 में चार्जशीट दाखिल की गई और संबंधित मजिस्ट्रेट ने मार्च 2021 में इस मामले में संज्ञान लिया। अब, दिसंबर 2021 में गोरखपुर के सत्र न्यायाधीश द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद, डॉ अयूब ने उच्च न्यायालय का रुख किया। आवेदक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत किया गया कि आवेदक निर्दोष है और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण वर्तमान मामले में झूठा फंसाया गया है।
आगे यह भी प्रस्तुत किया गया कि मामले को साबित करने के लिए डॉ. अयूब के खिलाफ कोई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य एकत्र नहीं किया गया है। यह भी प्रस्तुत किया गया कि आईपीसी की धारा 295 ए, 500, 504, 505, 506, के तहत अपराध आवेदक के खिलाफ नहीं बनता है और धारा 295 ए और 506, आईपीसी को छोड़कर सभी अपराध जमानती अपराध हैं। अंत में, यह तर्क दिया गया कि जवाबी हलफनामा दाखिल करने के बाद, एजीए ने यह नहीं बताया कि आवेदक के कब्जे से कौन सी सामग्री बरामद की गई थी और प्राथमिकी में घटना की कोई तारीख और समय का उल्लेख नहीं किया गया है।
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मामले में न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी की पीठ ने कहा कि यह कानून की एक स्थापित स्थिति है कि अग्रिम जमानत एक असाधारण विशेषाधिकार होने के कारण केवल असाधारण मामलों में ही दी जानी चाहिए। अदालत ने कहा, "एक गंभीर अपराध में अग्रिम जमानत देने के मापदंडों को संतुष्ट करने की आवश्यकता होती है, जहां न्यायालय को प्रथम दृष्टया यह विचार है कि आवेदक ने अपराध में झूठा आरोप लगाया है और अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा।

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