scriptHigh Court: No jurisdiction to issue warrant of direct arrest against | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- व्यक्ति के खिलाफ सीधे गिरफ्तारी का वारंट जारी करने का अधिकार क्षेत्र नहीं | Patrika News

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- व्यक्ति के खिलाफ सीधे गिरफ्तारी का वारंट जारी करने का अधिकार क्षेत्र नहीं

भरण-पोषण भत्ता देने के न्यायालय के आदेश का पालन करने में जस्टिस अजीत सिंह की पीठ ने कहा कि भरण-पोषण भत्ते का भुगतान न करने के ऐसे मामलों में दंडाधिकारी के पास सीआरपीसी की धारा 421 के तहत पहले से देय राशि को जुर्माने के रूप में लगाए बिना, उत्तरदायी व्यक्ति के खिलाफ सीधे गिरफ्तारी का वारंट जारी करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है।

इलाहाबाद

Published: April 22, 2022 09:22:26 am

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दाखिल याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि भरण-पोषण भत्ता देने के न्यायालय के आदेश का पालन करने में जस्टिस अजीत सिंह की पीठ ने कहा कि भरण-पोषण भत्ते का भुगतान न करने के ऐसे मामलों में दंडाधिकारी के पास सीआरपीसी की धारा 421 के तहत पहले से देय राशि को जुर्माने के रूप में लगाए बिना, उत्तरदायी व्यक्ति के खिलाफ सीधे गिरफ्तारी का वारंट जारी करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- व्यक्ति के खिलाफ सीधे गिरफ्तारी का वारंट जारी करने का अधिकार क्षेत्र नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- व्यक्ति के खिलाफ सीधे गिरफ्तारी का वारंट जारी करने का अधिकार क्षेत्र नहीं
संक्षेप में मामला आवेदक की पत्नी ने अपनी बेटी के साथ धारा 125 सीआरपीसी के तहत आवेदक-पति से भरण-पोषण की मांग करते हुए फैमिली कोर्ट, कासगंज के समक्ष आवेदन दायर किया। आवेदन की अनुमति दी गई थी। मामले में एक दिव्यांग व्यक्ति होने के कारण आवेदक आदेश का पालन करने में विफल रहा और इसलिए, अदालत ने एक वसूली वारंट जारी कर उसे प्रतिवादी संख्या 2 को भरण-पोषण के रूप में 30 जुलाई, 2017 से 19 जनवरी, 2020 तक 65,000/- रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया तथा वसूली वारंट के अनुसरण में, आवेदक को दिनांक 30 नवम्बर 2021 के आदेश द्वारा जेल भेज दिया गया।
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मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आगे कहा कि धारा 421 सीआरपीसी जुर्माना लगाने का तरीका निर्धारित करती है और धारा 421 की उप-धारा (1) के खंड (ए) में अपराधी से संबंधित किसी भी चल संपत्ति की ज़ब्ती और बिक्री द्वारा राशि की वसूली के लिए वारंट जारी करने का प्रावधान है। वहीं भरण- पोषण भत्ते के आदेश का पालन करने में पर्याप्त कारण के बिना किसी भी विफलता की स्थिति में, मजिस्ट्रेट को उस राशि की वसूली के उद्देश्य से एक संकट वारंट जारी करने का अधिकार है, जिस राशि के संबंध में चूक हुई है। किसी भी चल संपत्ति की ज़ब्ती और बिक्री द्वारा, जिसे ऐसे वारंट के निष्पादन में जब्त किया जा सकता है।

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