इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवक्ता के खाली पदों को भरने का निर्देश

गेस्ट लेक्चरर्स को सत्र के आखिर तक ही कार्य की छूट।

इलाहाबाद. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भारत सरकार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवक्ता के खाली पदों की भर्ती करने का निर्देश दिया है। साथ ही कार्यरत अतिथि प्रवक्ताओं को सत्रांत तक ही कार्य करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय को अध्यादेश 44 का कड़ाई से पालन करने का भी निर्देश दिया है। कोर्ट ने अतिथि प्रवक्ताओं की सेवा नियमित करने की मांग अस्वीकार कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति ए.पी.शाही तथा न्यायमूर्ति डी.एस.त्रिपाठी की खण्डपीठ ने भूगोल विभाग के डा.महेन्द्र शंकर सिंह व अन्य की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया है।



मालूम हो कि विश्वविद्यालय में प्रवक्ताओं की मानदेय पर नियुक्ति की गयी। पद खाली रहने पर कार्यकाल बढ़ाया जाता रहा। नियमानुसार नियुक्ति वर्ष से अगले तीन वर्ष तक ही अतिथि प्रवक्ता रह सकते हैं। 20 जनवरी 2001 को यह अवधि एक साल कर दी गयी।



कोर्ट ने कहा कि बिना ठोस आधार पर अतिथि प्रवक्ता को हटाकर दूसरे अतिथि प्रवक्ता को रखना उचित नहीं माना जा सकता। विश्वविद्यालय मनमानी नहीं कर सकता जिसको चाहे रखे, जिसको चाहे हटा दे। नियुक्तियां विश्वविद्यालय परिनियमावली के अनुरूप ही की जा सकती है। 1995 से गैस्ट फैकल्टी बनी तभी से अतिथि प्रवक्ता नियुक्त हो रहे है।



कोर्ट ने कार्यरत अतिथि प्रवक्ताओं को सत्रांत तक वेतन देने का भी आदेश दिया है। विश्वविद्यालय अगले सत्र से अध्यादेश 44 का कड़ाई से पालन करके। तथा भारत सरकार निर्धारित समय के भीतर प्रवक्ताओं का चयन पूरा करे। तदर्थ नियुक्ति भी अध्यादेश व स्टैच्यूट के विपरीत न हो। याचिका निस्तारित कर दी गयी है।
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रफतउद्दीन फरीद Desk/Reporting
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