हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से अदालतों की सुरक्षा का मांगा रोडमैप, कहा- सिर्फ कागजों पर हो रहा काम

कोर्ट ने वकीलों के लिए बायोमेट्रिक कार्ड की व्यवस्था शीघ्र करने का निर्देश दिया है ।

By: Akhilesh Tripathi

Published: 03 Jan 2020, 09:07 AM IST

प्रयागराज. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार को अदालतों की सुरक्षा का रोड मैप प्रस्तुत करने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट सहित सभी जिला अदालतों को फुलप्रूफ सुरक्षा देने के संबंध में सरकार 15 जनवरी अपना रोडमैप प्रस्तुत करें। बिजनौर जिला अदालत के एसीजीएम के न्याय कक्ष में अभियुक्त की गोली मारकर हत्या करने के मामले में स्वत संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने जिला न्यायालय में विशेष प्रशिक्षित फोर्स तैयार करने, सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने, बाउंड्री वाल बनाने, तथा अधिवक्ताओं व वादकारियों को बिना परिचय पत्र के प्रवेश नहीं देने संबंधित कई मुद्दों पर सरकार से हलफनामा मांगा है।


कोर्ट के निर्देश पर प्रमुख सचिव गृह अवनीश अवस्थी और डीजीपी ओ.पी. सिंह अदालत में हाजिर हुए उनकी ओर से हलफनामा प्रस्तुत कर अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई एवं सचिव गृह ने पूरा रोड मैप देने के लिए 15 जनवरी तक का समय मांगा है। जिला अदालतों में सीसीटीवी ठीक से काम नहीं करने के मुद्दे पर कोर्ट का कहना था कि हाईकोर्ट सहित जहां भी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं वह ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। उनकी क्वालिटी भी अच्छी नहीं है। इस पर सरकार की ओर से कहा गया कि उनके पास कैमरों की देखभाल के लिए कोई टेक्निकल आदमी नहीं है। इस मामले में वह पीसीआई से एक्सपर्ट मांगेंगे और उनकी तैनाती सभी जिला अदालतों में की जाएगी। कोर्ट का कहना था कि इटावा के जिला जज ने रिपोर्ट भेजी है कि वहां सीसीटीवी कैमरे ठीक काम नहीं कर रहा है। इस संबंध में क्या कदम उठाए गए। इस पर अधिकारियों ने बताया कि इटावा के डीएम और एसएसपी को वहां के जिला जज से संपर्क कर सारी व्यवस्था ठीक करने का निर्देश दिया गया है।


अदालत ने कहा कि सरकार के सभी काम कागजों पर है वास्तविकता में धरातल पर कोई काम दिखाई नहीं दे रहा है। अधिकारियों की ओर से बताया गया कि कई जिला अदालतों में वकील सुरक्षाबलों को सहयोग नहीं करते हैं। जिसके कारण उनके बीच में झगड़ा हो जाता है। हाईकोर्ट में भी कुछ वकील पिस्टल लेकर के आते हैं ऐसी जानकारी मिली है। इस पर कोर्ट का कहना था राज्य सरकार स्वयं में एक संस्था है और इस मामले में कार्रवाई करने को सक्षम है। बाउंड्री वाल बनाए जाने के मामले में सरकार का कहना था कि ज्यादातर जिला अदालतों में बाउंड्री वाल का निर्माण हो गया है। कुछ जगहों पर अतिक्रमण के कारण अभी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। निर्माण निगम को उसका ठेका दिया गया है। इस पर कोर्ट ने बाउंड्री वाल बनाने का काम शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया है।

प्रदेश सरकार का यह भी कहना था कि कई जिला अदालतों में जिला जज सहयोग नहीं कर रहे हैं। जिस पर कोर्ट ने कहा कि जहां पर भी जिला जज सहयोग नहीं कर रहे हैं उनकी सूचना हमें लिखित में दी जाए हम उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करेंगे। इसी प्रकार सुरक्षाबलों को सहयोग नहीं करने वाले कुछ वकीलों के बारे में भी कोर्ट का कहना था कि यदि चंद लोग सहयोग नहीं कर रहे हैं तो उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि बलिया में जो बाउंड्री वाल बनाई गई है वह काफी खराब थी और उसे बाद में तोड़ करके फिर से बनवाना पड़ा। प्रदेश सरकार जो भी काम करवा रही है उसकी गुणवत्ता सही होनी चाहिए।

कोर्ट ने वकीलों के लिए बायोमेट्रिक कार्ड की व्यवस्था शीघ्र करने का निर्देश दिया है ।प्रमुख सचिव अवनीश अवस्थी ने बताया कि जिला अदालतों में विशेष प्रशिक्षित फोर्स तैनात करने के मामले में 20 जनवरी तक प्रशिक्षण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। कोर्ट ने वेंडरों पर भी रोक लगाने का निर्देश दिया है। याचिका पर अगली सुनवाई 16 जनवरी को होगी । इस तिथि को प्रदेश सरकार को अपना रोड मैप अदालत में प्रस्तुत करना है।

BY- Court Corrospondence

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