संगम की रेती पर फिर सजेगा किन्नर संतो का दरवार , पहली बार माघ मेले किसी अखाड़े की जमात लगेगी

बीते कुंभ में आकर्षण का केंद्र रहे किन्नर संत

प्रयागराज। संगम की रेती पर लगने वाला माघ मेला एक बार फिर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करेगा । इसका सबसे बड़ा कारण किन्नर अखाड़े के संत होंगे। बीते कुंभ में देश और दुनिया के श्रद्धालुओं को आकर्षित करने वाले किन्नर एक बार फिर प्रयागराज के माघ मेले में आकर्षण का केंद्र बनेंगे। जिसके लिए किन्नर संतो ने अपने अखाड़ों में तैयारियां शुरू हो गई है।

गंगा यमुना सरस्वती के पावन तट पर अर्धकुंभ और महाकुंभ के अलावा अखाड़े नहीं आते हैं। लेकिन ऐसा पहली बार होगा जब संगम की रेती पर माघ मेले में किन्नर अखाड़े अपनी जमात के साथ पहुंचेंगे। किन्नर अखाड़ा पहली बार माघ मेले में अपना शिविर लगाएगा। बल्कि अखाड़े के सभी महामंडलेश्वर मंडलेश्वर श्री महंत पीठाधीश्वर कल्पवास करेंगे।बता दें कि दिव्य भव्य कुंभ के समापन के दौरान संगम की रेती से विदा हो रहे किन्नर संतो ने यह संकल्प लिया था कि अखाड़े के संत कुंभ और अर्ध कुंभ की तरह माघ मेले में भी संगम तट पर रुककर कल्पवास और अनुष्ठान करेंगे।

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जानकारी के मुताबिक आगामी 5 जनवरी को किन्नर अखाड़ा धूमधाम से देवत्व यात्रा निकालेंगे जो संगम तट पर पहुंचेगी। 51 रथो पर होकर अखाड़े के महामंडलेश्वर पीठाधीश्वर महंत विराजित हो के संगम तट पर पहुंचेंगे।इसके साथ ही देवत्व यात्रा के लिए काशी से डमरु बजाने वाले साधकों को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया है पूरे रास्ते में अलग.अलग स्थानों पर किन्नर अखाड़े का सामाजिक संस्था और भक्तों द्वारा स्वागत सम्मान किया जाएगा। किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी द्वारा मीडिया को दी गई जानकारी के मुताबिक पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक कल्पवास के साथ किन्नर अखाड़े के सभी महामंडलेश्वर पीठाधीश्वर महंत प्रयागराज में रुककर सनातन धर्म के परंपराओं का पालन करेंगे। गौरतलब है की बीते कुंभ मेले में पहली बार किन्नर अखाड़े के संतो ने शाही स्नान किया था। जो बड़े आकर्षण का केंद्र रहा।

प्रसून पांडे
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